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यौन उत्तेजना में युवक ने अपने प्राइवेट पार्ट में डाली बोतल, 36 घंटे दर्द से कराहता रहा, ऐसे मिली रही राहत

Aryan
16 March 2026 8:00 PM IST
यौन उत्तेजना में युवक ने अपने प्राइवेट पार्ट में डाली बोतल, 36 घंटे दर्द से कराहता रहा, ऐसे मिली रही राहत
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अस्पताल के वरिष्ठ सर्जन ने जानकारी दी कि यह मामला बेहद नाजुक था, क्योंकि बोतल निकालते समय यह ध्यान रखना जरूरी था कि आंत अथवा मलाशय को कोई नुकसान न पहुंचे

आगरा। यूपी के आगरा से बेहद चौंकाने वाला एक मामला सामने आया है। दरअसल एक 38 साल के व्यक्ति के मलाशय में एक लीटर पानी की प्लास्टिक बोतल फंस गई है। इसकी वजह से उसे असहनीय दर्द होने लगा। युवक की हालत बिगड़ने पर परिजनों ने उसे शहर के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया। जानकारी के मुताबिक, अस्पताल में डॉक्टरों ने करीब एक घंटे से अधिक सर्जरी करने के बाद बोतल को बाहर निकाला।

युवक लगातार 36 घंटे तक दर्द सहा

जानकारी के अनुसार, साकेत कॉलोनी निवासी युवक लगभग 36 घंटे तक दर्द सहता रहा। जब तकलीफ अधिक बढ़ गई तो उसे अस्पताल ले जाया गया। जांच के दौरान डॉक्टरों ने एक्स-रे कराया, जिसमें पता चला कि उसके मलाशय के भीतर एक लीटर की प्लास्टिक बोतल अटकी हुई है। इसके बाद उसे तुरंत इमरजेंसी में भर्ती किया गया।

वरिष्ठ सर्जन ने दी जानकारी

अस्पताल के वरिष्ठ सर्जन ने जानकारी दी कि यह मामला बेहद नाजुक था, क्योंकि बोतल निकालते समय यह ध्यान रखना जरूरी था कि आंत अथवा मलाशय को कोई नुकसान न पहुंचे। डॉक्टरों की टीम ने सावधानी से ऑपरेशन कर लगभग एक घंटे 10 मिनट की कोशिश के बाद बोतल को बाहर निकाल लिया।

जांच के लिए सिग्मॉयडोस्कोपी भी की गई

सर्जरी के बाद युवक को डॉक्टरों निगरानी में रखा गया। इसके लिए डॉक्टरों ने आगे की जांच के लिए सिग्मॉयडोस्कोपी भी की, जिससे अंदरूनी चोट या संक्रमण पता चल सके। युवक का इलाज लगभग चार दिनों तक चलता रहा। जब डॉक्टरों को यकीन हो गया कि उसे शौच करने में कोई दिक्कत नहीं है और हालत सामान्य है, तब उसे अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया।

मनो-यौन विकार ‘एनल इरोटिसिज्म’ से पीड़ित

डॉक्टरों ने कहा कि युवक एक मनो-यौन विकार ‘एनल इरोटिसिज्म’से पीड़ित है। चिकित्सकों के अनुसार, इस स्थिति में कुछ लोग असामान्य यौन उत्तेजना या आनंद की वजह से शरीर के निजी अंगों के साथ जोखिम भरा व्यवहार कर बैठते हैं। डॉक्टरों ने कहा कि ऐसे मामलों में मरीज अक्सर शर्म के कारण देर से अस्पताल पहुंचते हैं जिससे खतरा अधिक बढ़ जाता है। डॉक्टरों ने यह भी कहा कि ऐसे मामलों में मरीजों की काउंसलिंग की जरूरत होती है।


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