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सुबह से शाम तक करेंगे पूजा...धार भोजशाला मामले में सुप्रीम कोर्ट ने दिया अहम सुझाव

भोपाल। मध्य प्रदेश के धार की भोजशाला में बसंत पंचमी की पूजा और नमाज को लेकर आज यानी को सुप्रीम कोर्ट में हिंदू और मुस्लिम पक्ष के बीच बहस हो गई। दरअसल मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की बेंच ने सुझाव दिया कि हिंदू सुबह 12 बजे तक पूजा करेंगे और बाद में शाम 4 बजे से पूजा करें।
जुमे की नमाज का समय तय है
याचिकाकर्ता ने कहा कि यदि नमाज ही 5 बजे के बाद हो सके तो बेहतर होगा, जिस पर मुस्लिम पक्ष के वकील ने कहा कि जुमे की नमाज का समय तय है। इसे बदला नहीं जा सकता है।
दोपहर 1 से 3 बजे तक नमाज पढ़ने का समय था
दरअसल हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस नाम की संस्था ने उस दिन मुसलमान को वहां नमाज पढ़ने से रोकने की मांग करते हुए याचिका दाखिल की है। याचिका के अनुसार, आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया ने हिंदुओं को हर मंगलवार और बसंत पंचमी पर पूजा की अनुमति दी है, जबकि मुस्लिमों को हर शुक्रवार दोपहर 1 से 3 बजे तक नमाज अदा करने की इजाजत मिली है। लेकिन साल 2003 के इस आदेश में यह नहीं बताया गया कि यदि बसंत पंचमी शुक्रवार हो तो क्या होगा।
सनातन धर्म के अनुयायियों का बसंत पंचमी पवित्र पर्व
याचिका में कहा गया कि बसंत पंचमी सनातन धर्म के अनुयायियों के लिए अत्यंत पवित्र पर्व है और इस दिन मां सरस्वती की पारंपरिक पूजा लंबे समय से होती रही है। लेकिन जब कभी बसंत पंचमी शुक्रवार को पड़ती है, तो पूजा और नमाज एक साथ होने से अव्यवस्था, टकराव और कभी-कभी सांप्रदायिक तनाव की स्थिति उत्पन्न हो जाती है।
गौरतलब है कि कोर्ट ने दलीलें सुनने के बाद आदेश दिया कि दोपहर में 1 से 3 बजे के बीच नमाज के लिए परिसर में अलग से विशिष्ट स्थान दिया जाए, जहां शांति से मुस्लिम नमाज अदा कर सकें। कोर्ट ने हिंदुओं के लिए भी यही आदेश दिया कि सरस्वती पूजा, हवन और बसंत पंचमी से जुड़े अन्य कार्यक्रमों के लिए परिसर में अलग स्थान हो।




