आखिर बाबा महाकाल के दरबार में ही क्यों सबसे पहले किया जाता है होलिका दहन, जानें क्या है प्राचीन परंपरा

Update: 2026-02-28 02:30 GMT

उज्जैन। उज्जैन के प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर में सबसे पहले होलिका दहन करने की परंपरा के पीछे धार्मिक और सांस्कृतिक रहस्य छिपे हैं।

राजाधिराज का स्वरूप

उज्जैन के राजा भगवान महाकाल को ब्रह्मांड का अधिपति और 'राजाधिराज' माना जाता है। सनातन परंपरा के अनुसार, प्रजा से पहले राजा के आंगन में उत्सव मनाने का विधान है, इसलिए हर त्यौहार की शुरुआत सबसे पहले यहीं से होती है।

भस्म आरती का महत्व

होलिका दहन की अगली सुबह होने वाली विशेष भस्म आरती में महाकाल का श्रृंगार इसी पवित्र अग्नि की ताजी राख (विभूति) से किया जाता है।

प्राचीन परंपरा

यह परंपरा अनादि काल से चली आ रही है। संध्या आरती के बाद मंदिर परिसर में ओमकारेश्वर शिखर के पास विधि-विधान से होलिका पूजन और दहन किया जाता है, जिसके बाद ही देश के अन्य हिस्सों में दहन शुरू होता है।

भक्त और भगवान का मिलन

यहाँ की होली अन्य शिव मंदिरों से अलग होती है। भक्त सबसे पहले बाबा को हर्बल गुलाल और फूल अर्पित कर आशीर्वाद लेते हैं, जो जीवन में खुशहाली और पापों के क्षय का प्रतीक माना जाता है।

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