चौंकिए मत! 42 साल बाद उस व्यक्ति को बाइज्जत रिहा किया गया, जिसकी उम्र है सौ साल, पूरा मामला जानकर हैरान हो जाएंगे
नई दिल्ली। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने हाल ही में हमीरपुर, उत्तर प्रदेश के रहने वाले धनी राम को हत्या के एक मामले में 42 साल बाद बाइज्जत बरी कर दिया है। 100 साल की उम्र में मिली इस राहत ने भारतीय न्यायिक प्रक्रिया में होने वाली अत्यधिक देरी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
क्या है पूरा मामला
यह घटना 1982 की है, जिसमें धनी राम पर हत्या का आरोप लगा था। 1984 में सत्र न्यायालय ने उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। धनी राम ने 1984 में ही इस फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती दी थी। उनकी अपील 40 से अधिक वर्षों तक लंबित रही, जिसके दौरान वह लंबे समय तक जमानत पर रहे।
अदालत की टिप्पणी
न्यायमूर्ति चंद्रधारी सिंह और न्यायमूर्ति संजीव कुमार की खंडपीठ ने फैसला सुनाते हुए कहा कि न्याय मानवीय परिस्थितियों से अलग कोई अमूर्त वस्तु नहीं है। अदालत ने माना कि बढ़ती उम्र की शारीरिक अक्षमता और दशकों तक झेली गई सामाजिक प्रताड़ना को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
बरी होने का कारण
हाई कोर्ट ने पाया कि अभियोजन पक्ष (Prosecution) आरोपों को संदेह से परे साबित करने में पूरी तरह विफल रहा। मुख्य गवाहों के बयानों में विरोधाभास और साक्ष्यों की कमी के आधार पर उन्हें संदेह का लाभ देते हुए बरी किया गया।
पहले भी सामने आया था एक मामला
इसी तरह का एक और मामला मई 2025 में भी सामने आया था, जहां कौशांबी के लखन सरोज (उम्र 103-104 वर्ष) को 43 साल की कानूनी लड़ाई के बाद बरी किया गया था।