मथुरा में इतिहास ने ली करवट! 5200 साल पुरानी अद्भुत परंपरा जीवंत हो उठी, 30 फीट ऊंची धधकती आग के बीच से दौड़ा संजू पंडा

Update: 2026-03-03 15:00 GMT

मथुरा। मथुरा के फालैन गांव में होलिका दहन के दौरान एक बार फिर 5200 साल पुरानी अद्भुत परंपरा जीवंत हो उठी। दरअसल एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। बता दें कि होलिका दहन के दिन संजू पंडा ने करीब 30 फीट ऊंची धधकती आग की लपटों के बीच से दौड़कर इस प्राचीन अनुष्ठान को पूरा किया और वे पूरी तरह सुरक्षित बाहर निकल आए।

अद्भुत परंपरा

यह परंपरा सतयुग के भक्त प्रह्लाद की कहानी को दोहराती है। मान्यता है कि फालैन वही स्थान है जहाँ होलिका प्रह्लाद को लेकर अग्नि में बैठी थी, लेकिन प्रह्लाद सुरक्षित रहे और होलिका जल गई।

कठिन तप का नतीजा

संजू पंडा ने इस अनुष्ठान के लिए वसंत पंचमी से ही 45 दिनों का कठिन व्रत रखा था। इस दौरान वे प्रह्लाद मंदिर में रहे, जमीन पर सोए और केवल फल व दूध का सेवन किया।

अनुष्ठान की प्रक्रिया

ब्रह्म मुहूर्त (सुबह करीब 4 बजे) में संजू पंडा ने प्रह्लाद कुंड में स्नान किया। उनकी बहन ने जलती हुई होलिका की परिक्रमा कर कलश से जल अर्पित किया, जिसके बाद संजू धधकती आग के बीच से सुरक्षित निकल गए। इस दृश्य को देखने के लिए देश-विदेश से 80,000 से 1 लाख तक श्रद्धालु जुटे थे, जिन्होंने 'भक्त प्रह्लाद की जय' के जयकारों से पूरे गांव को गुंजायमान कर दिया।

पारिवारिक विरासत

संजू पंडा के परिवार की कई पीढ़ियां इस परंपरा को निभा रही हैं। उनसे पहले उनके भाई मोनू पंडा (5 बार) और पिता सुशील पंडा (8 बार) भी आग से सुरक्षित निकल चुके हैं। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसे लोग आस्था की शक्ति का प्रत्यक्ष प्रमाण मान रहे हैं।

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