लैंगिक संवेदनशीलता के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए एनसीआरटीसी ने की पहल, लॉन्च किया यह अभियान

एनसीआरटीसी के प्रबंध निदेशक ने‘निर्भया फंड’ के तहत लॉन्च किया ‘आकांक्षाओं के पंख’ अभियान

Update: 2026-03-24 16:34 GMT

नई दिल्ली। एनसीआरटीसी के प्रबंध निदेशक, शलभ गोयल ने आज सराय काले खां नमो भारत स्टेशन पर लैंगिक समानता और संवेदनशीलता के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए एक अभियान, 'आकांक्षाओं के पंख' का शुभारंभ किया। यह अभियान भारत सरकार के ‘निर्भया फंड’ के अंतर्गत चलाया जा रहा है, जिसका उद्देश्य महिलाओं की सुरक्षा के प्रति संवेदनशीलता बढ़ाना, यात्रियों को इस विषय में जागरूक करना तथा नमो भारत में सुरक्षित यात्रा परिवेश सुनिश्चित करने के लिए किए जा रहे विभिन्न प्रयासों की जानकारी देना है। इस अवसर पर निर्भया के माता-पिता, श्रीमती आशा देवी और बद्रीनाथ सिंह, वरिष्ठ महिला पत्रकार और मोटिवेशनल स्पीकर, ऋचा अनिरुद्ध विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। इसके अलावा एनसीआरटीसी की निदेशक (वित्त), नमिता मेहरोत्रा और एनसीआरटीसी के वरिष्ठ अधिकारी एवं हितधारक संस्थाओं के प्रतिनिधि भी कार्यक्रम में मौजूद रहे।

महिला सुरक्षा हेल्पलाइन शामिल

एनसीआरटीसी के प्रबंध निदेशक द्वारा एक वीडियो के माध्यम से इस अभियान का औपचारिक शुभारंभ किया गया, जिसमें इसके तहत नियोजित विभिन्न पहलों को दर्शाया गया। इनमें स्टेशन परिसरों के बाहर सुरक्षित आवागमन सुनिश्चित करने के लिए सीसीटीवी कैमरों से निगरानी, स्टेशन के आसपास पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था, इमर्जेंसी के लिए ‘नमो भारत कनेक्ट’ मोबाइल ऐप में एसओएस सुविधा तथा त्वरित सहायता के लिए एक समर्पित महिला सुरक्षा हेल्पलाइन शामिल हैं। इस पहल के अंतर्गत फिल्मों, नुक्कड़ नाटकों, कार्यशालाओं और सामुदायिक सहभागिता गतिविधियों के माध्यम से जागरूकता और लैंगिक संवेदनशीलता को भी बढ़ावा दिया जाएगा, जिसका उद्देश्य एक सुरक्षित, सम्मानजनक और संवेदनशील यात्रा परिवेश को बढ़ावा देना है।

हमारा उद्देश्य जागरूकता बढ़ाना

इस अवसर पर बोलते हुए एनसीआरटीसी के प्रबंध निदेशक, श्री शलभ गोयल ने कहा कि प्रत्येक यात्री के लिए एक सुरक्षित और सम्मानजनक वातावरण सुनिश्चित करना हमारी प्राथमिकता है। एनसीआरटीसी में हम यह मानते हैं कि सुरक्षा केवल इंफ्रास्ट्रक्चर तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सामूहिक जिम्मेदारी है। ‘आकांक्षाओं के पंख; अभियान, जो अगले 5 साल तक चलाया जाएगा, इसके माध्यम से हमारा उद्देश्य जागरूकता बढ़ाना एवं सामाजिक भागीदारी को प्रोत्साहित करना है जिससे नमो भारत में महिलाओं के लिए विश्वसनीय और सुरक्षित याक्षा सुनिश्चित की जा सके।

महिलाओं के बेहतर भविष्य के लिए मार्ग प्रशस्त

निर्भया की माता आशा देवी ने भी कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अपनी चुनौतीपूर्ण यात्रा के विषय में बताया। साथ ही, उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त की कि अब परिस्थितियां बदल रही हैं। नमो भारत जैसी परियोजना एक स्वागतयोग्य शुरुआत है और ऐसी पहलें महिलाओं के बेहतर भविष्य के लिए मार्ग प्रशस्त करने हेतु महत्वपूर्ण हैं।

हर व्यक्ति एक जिम्मेदार सहयात्री बनेगा

ऋचा अनिरुद्ध ने भी इस मुद्दे पर अपने विचार व्यक्त किए और अपने निजी अनुभव साझा करते हुए कहा कि आज से तीन दशक पहले मैं पढ़ाई के लिए दिल्ली आई थी। आज जब मैं स्वयं एक बेटी की मां हूं , मैं अपने अभिभावकों के उस डर को समझ सकती हूँ जो उन्होंने उस समय महसूस किया होगा। आज नमो भारत में यात्रा का अनुभव करने के बाद विश्वास के साथ यह कह सकती हूँ कि स्थितियाँ बेहतरी की तरफ़ अग्रसर हैं। हम आशंकाओं पर विराम लगा कर, आकाँक्षाओं के पंख लगाकर उड़ान भर रहे हैं। उन्होंने सामूहिक ज़िम्मेदारी पर विशेष ज़ोर देते हुए कहा कि सरकार और एनसीआरटीसी अपनी तरफ से पहल कर सकती हैं, पर उनकी सफलता तभी सुनिश्चित होगी जब सोच बदलेगी और हर व्यक्ति एक जिम्मेदार सहयात्री बनेगा।

संवेदनशीलता कार्यशाला का आयोजन

इस कार्यक्रम में लैंगिक संवेदनशीलता और महिला सशक्तिकरण के विषय पर एनसीआरटीसी द्वारा निर्मित दो शॉर्ट फिल्मों का प्रीमियर भी किया गया। इस अवसर पर प्रबंध निदेशक ने एक ‘ग्रैटिट्यूड वॉल’ का भी उद्घाटन किया, जहां अतिथियों ने उनके जीवन को प्रभावित करने वाली महिलाओं के प्रति आभार व्यक्त करते हुए हस्तलिखित संदेश साझा किए। यह वॉल आगामी कुछ महीनों तक स्टेशनों पर स्थापित रहेंगी, ताकि अन्य यात्री भी इसमें भाग लेकर अपने जीवन में अहमियत रखने वालीं महिलाओं के प्रति सम्मान और आभार प्रकट कर सकें। इस जागरूकता पहल के अंतर्गत नुक्कड़ नाटक तथा ‘लास्ट माइल कनेक्टिविटी’ प्रदान करने वाले वाहन चालकों के लिए लैंगिक संवेदनशीलता कार्यशाला का भी आयोजन किया गया।

कई स्थानों पर लगाए गए बैनर एवं पोस्टर

इस अभियान के प्रमुख संदेशों को प्रभावी ढंग से यात्रियों के बीच पहुंचाने के लिए ट्रेनों के भीतर और स्टेशन परिसरों में कई स्थानों पर बैनर एवं पोस्टर लगाए गए हैं, जिनमें लैंगिक संवेदनशीलता और सम्मानजनक व्यवहार से जुड़ी दैनिक परिस्थितियों को दर्शाया गया है। यह अभियान जेंडर सेंसटाइज़ेशन के प्रति जागरूकता बढ़ाने, महिला यात्रियों की चुनौतियों को समझने तथा उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने में आम नागरिकों की भूमिका को रेखांकित करने पर केंद्रित है।

एनसीआरटीसी की प्रतिबद्धता को दोहराती

‘आकांक्षाओं के पंख’ आगामी पांच वर्षों तक चलाया जाने वाला एक अभियान है। एनसीआरटीसी इसके माध्यम से केवल व्यवस्थाओं को ही नहीं, बल्कि सोच और दृष्टिकोण को बदलने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठा रहा है। एनसीआरटीसी का विश्वास है कि जागरूकता, सहानुभूति और साझा जिम्मेदारी के माध्यम से ही वास्तव में एक सुरक्षित सार्वजनिक परिवहन का निर्माण होता है। यह पहल नमो भारत नेटवर्क की प्रत्येक यात्रा को सुरक्षित, समावेशी और सम्मानजनक बनाने के प्रति एनसीआरटीसी की प्रतिबद्धता को दोहराती है।

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