नवरात्र के नौवे दिन मां सिद्धिदात्री को नमन! जानें माता का स्वरूप, भोग, मंत्र और कथा

Update: 2026-03-27 02:30 GMT

नई दिल्ली। नवरात्रि का नौवां दिन (महानवमी) मां सिद्धिदात्री को समर्पित है, जो सभी प्रकार की सिद्धियों की देवी हैं। मां की पूजा से भक्तों को ज्ञान, मोक्ष और अलौकिक शक्तियां मिलती हैं, जिससे वे अष्ट सिद्धि (अणिमा, महिमा, आदि) प्राप्त करते हैं। इस दिन बैंगनी रंग शुभ माना जाता है, और मां को हलवा-पूरी, खीर और नारियल का भोग लगाया जाता है।

भोग

माँ सिद्धिदात्री को हलवा, पूरी, खीर, चने और नारियल का भोग लगाना उत्तम माना जाता है।

मंत्र

मूल मंत्र: ॐ ह्रीं क्लीं ऐं सिद्धये नम:।

ध्यान मंत्र: या देवी सर्वभू‍तेषु माँ सिद्धिदात्री रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।

पूजा विधि: सुबह जल्दी उठकर स्नान करें, बैंगनी रंग के वस्त्र पहनें। मां को कमल का फूल, मौली, रोली, कुमकुम अर्पित करें। इसके बाद भोग लगाकर आरती करें और नौ कन्याओं को भोजन कराएं।

कथा

पौराणिक कथा के अनुसार, जब ब्रह्मांड में अंधकार था, तब माँ सिद्धिदात्री ने प्रकट होकर ब्रह्मा, विष्णु और महेश को जन्म दिया। मां की कृपा से ही भगवान शिव को आठ सिद्धियां प्राप्त हुईं और उनका आधा शरीर देवी का हो गया, जिससे वे 'अर्धनारीश्वर' कहलाए।

सिद्धिदात्री पूजा के लाभ

इनकी पूजा करने से सभी प्रकार की सिद्धियां प्राप्त होती हैं और जीवन के कठिन काम भी सरल हो जाते हैं। इनके आशीर्वाद से जीवन में सुख-समृद्धि और मोक्ष की प्राप्ति होती है। 

मां सिद्धिदात्री का स्वरूप

मां सिद्धिदात्री चार भुजाओं वाली हैं। उनके हाथों में गदा, चक्र, कमल और शंख विराजमान रहते हैं। मां सिद्धिदात्री कमल पर विराजमान होती हैं। मां का स्वरूप अत्यंत शांत, दिव्य और कल्याणकारी है, जो भक्तों को आध्यात्मिक उन्नति की ओर प्रेरित करता है।

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