ट्रांसजेंडर बिल पर प्रियंका गांधी ने सरकार पर किया हमला! बोलीं- यह BILL उनकी पहचान खत्म कर देगा, जानें क्या है
नई दिल्ली। कांग्रेस MP प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा कि हम कहते थे कि हम वर्ल्ड लीडर हैं। हम कहते थे कि हम शांति बनाने वाले हैं। चाहे यूक्रेन में युद्ध हो या आज के हालात, हमें इसके बारे में सोचना चाहिए। साथ ही ट्रांसजेंडर बिल पर उन्होंने कहा कि मुझे सच में लगता है कि यह बहुत बुरा है कि वे इसे स्टैंडिंग कमेटी को नहीं भेज रहे हैं।
यह बिल उनकी पहचान खत्म कर देगा
प्रियंका गांधी ने कहा कि कम्युनिटी को लगता है कि यह बिल उनकी पहचान खत्म कर देगा और इसलिए यह बहुत जरूरी था कि उनसे सलाह ली जाती और यह बिल जो लाया जा रहा है। उसे सही सलाह के बाद ही पास किया जाना चाहिए था। मुझे लगता है कि यह बहुत गलत है कि पूरी कम्युनिटी को लगता है कि उनसे सलाह नहीं ली गई है और उनके संदर्भ में इतना बड़ा फैसला लिया जा रहा है। काश सरकार ने उनकी बात सुनी होती और इसे स्टैंडिंग कमेटी में रखा होता।
उनके कल्याण के लिए बनाया गया एक महत्वपूर्ण कानून
ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम, 2019 भारत सरकार द्वारा ट्रांसजेंडर समुदाय के अधिकारों की रक्षा और उनके कल्याण के लिए बनाया गया एक महत्वपूर्ण कानून है। यह कानून ट्रांसजेंडर व्यक्ति को ऐसे व्यक्ति के रूप में परिभाषित करता है जिसका लिंग (gender) जन्म के समय निर्धारित लिंग से मेल नहीं खाता। इसमें 'ट्रांस-मेन', 'ट्रांस-वूमेन', 'इंटरसेक्स' और 'किन्नर' जैसे समुदाय शामिल हैं। शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य सेवा और सरकारी या निजी प्रतिष्ठानों में ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के साथ भेदभाव करना अब गैरकानूनी है।
पहचान का अधिकार
प्रत्येक ट्रांसजेंडर व्यक्ति को अपनी पहचान का अधिकार है। वे जिला मजिस्ट्रेट (DM) के पास आवेदन कर 'ट्रांसजेंडर प्रमाणपत्र' प्राप्त कर सकते हैं। यदि कोई व्यक्ति सर्जरी के माध्यम से लिंग परिवर्तन करवाता है, तो वह 'पुरुष' या 'महिला' के रूप में संशोधित प्रमाण पत्र भी ले सकता है।
निवास का अधिकार
किसी भी ट्रांसजेंडर बच्चे को उसके परिवार से अलग नहीं किया जा सकता (जब तक कि अदालत का आदेश न हो)। यदि परिवार देखभाल नहीं कर सकता, तो उन्हें पुनर्वास केंद्र में रखा जाएगा। सरकार को ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के लिए अलग एचआईवी (HIV) निगरानी केंद्र, लिंग परिवर्तन सर्जरी (SRS) की सुविधा और स्वास्थ्य बीमा योजनाएं प्रदान करने का निर्देश दिया गया है।
राष्ट्रीय परिषद
सरकार ने इस समुदाय की समस्याओं के समाधान और नीतियों की निगरानी के लिए 'राष्ट्रीय ट्रांसजेंडर परिषद' का गठन किया है। ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को बंधुआ मजदूर बनाना, उन्हें सार्वजनिक स्थानों से रोकना या उनका शारीरिक/मानसिक शोषण करना अपराध है, जिसके लिए 6 महीने से 2 साल तक की जेल और जुर्माने की सजा हो सकती है।