साइना नेहवाल: भारत की बेटी जिसने देश के लिए जिए सपने! गर्व के साथ ली विदाई, क्या आगे कोई पोस्टर गर्ल आएगी?
नई दिल्ली। साइना की कहानी केवल पदकों की नहीं, बल्कि उस विश्वास की है कि भारत चीन और अन्य एशियाई देशों के दबदबे को चुनौती दे सकता है। साइना नेहवाल ने 20 जनवरी 2026 को आधिकारिक तौर पर बैडमिंटन से अपने संन्यास की पुष्टि कर दी है। उन्होंने एक पॉडकास्ट में साझा किया कि उनका शरीर अब इस खेल की कठिन शारीरिक मांगों को सहन करने में सक्षम नहीं है। साइना ने करीब दो साल पहले ही प्रतिस्पर्धी मैच खेलना बंद कर दिया था, लेकिन अब उन्होंने औपचारिक विदाई ले ली है।
मां का सपना किया साकार
17 मार्च 1990 को हरियाणा के हिसार में जब एक बच्ची ने जन्म लिया तो परिवार में हर कोई खुश नहीं था। रिपोर्ट्स बताती हैं कि दादी ने देखने से ही इनकार कर दिया, क्योंकि वह लड़की थी, लेकिन किसे पता था कि यही बच्ची एक दिन न सिर्फ अपनी दादी, बल्कि पूरे देश का सिर गर्व से ऊंचा करेगी। साइना की मांका एक सपना था कि बेटी बैडमिंटन खेले। साइना की बैडमिंटन में एंट्री तभी हुई थी।
'कार्टिलेज खत्म हो चुका है'
2024 में साइना ने खुद खुलासा किया कि उन्हें आर्थराइटिस है और घुटने की कार्टिलेज पूरी तरह घिस चुकी है। उन्होंने कहा, 'जहां पहले मैं आठ-नौ घंटे ट्रेनिंग कर पाती थी, अब एक-दो घंटे में ही घुटना सूज जाता था… फिर मैंने कहा—बस, अब और नहीं।' चिकित्सा विज्ञान कहता है कि ऐसे में करियर खत्म मानो। पर साइना ने इसे पराजय नहीं, निर्णय कहा।
ऐतिहासिक ओलंपिक पदक
2012 के लंदन ओलंपिक में कांस्य पदक जीतकर वह ओलंपिक पदक जीतने वाली पहली भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ी बनीं।
विश्व नंबर 1
वह बैडमिंटन रैंकिंग में नंबर 1 के शिखर पर पहुँचने वाली पहली भारतीय महिला खिलाड़ी बनीं।
पदक और सम्मान
उन्होंने अपने करियर में 24 अंतरराष्ट्रीय खिताब जीते हैं और उन्हें पद्म भूषण, पद्म श्री और राजीव गांधी खेल रत्न (अब मेजर ध्यानचंद खेल रत्न) से सम्मानित किया गया है।
आत्मकथा
उनकी आत्मकथा का नाम 'प्लेइंग टू विन: माई लाइफ ऑन एंड ऑफ कोर्ट' है, जो 2012 में प्रकाशित हुई थी।
बायोपिक
उनके जीवन पर आधारित फिल्म 'साइना' (2021) में अभिनेत्री परिणीति चोपड़ा ने उनकी भूमिका निभाई थी।
क्या आगे कोई ऐसा आएगा? (भविष्य की उम्मीदें)
हालांकि साइना और पीवी सिंधु जैसे दिग्गजों के बाद भारतीय महिला बैडमिंटन में एक खालीपन की बात कही जा रही है, लेकिन 2026 की शुरुआत में कुछ उभरते खिलाड़ियों ने शानदार उम्मीदें जगाई हैं। अनमोल खरब, तन्वी शर्मा, मालविका बंसोड़ जैसे खिलाड़ियों ने उम्मीद जगाई है।
साइना नेहवाल ने जो रास्ता दिखाया था, उस पर आज ये युवा लड़कियां अपनी पहचान बना रही हैं। जहाँ साइना ने एक सपना दिया, वहीं ये नई पीढ़ी उस सपने को वैश्विक स्तर पर टिकाऊ बनाने की कोशिश कर रही है