हिमंता बिस्वा सरमा के खिलाफ याचिका पर सुनवाई से SC ने किया इनकार! याचिकाकर्ता को दी यह सलाह, जानें मामला

Update: 2026-02-16 08:20 GMT

नई दिल्ली। असम के सीएम हिमंता बिस्वा सरमा की विवादित स्पीच और पोस्ट के खिलाफ याचिका दाखिल करने वालों को सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट जाने की सलाह दी है। इस दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कुछ सख्त टिप्पणियां भी की हैं। उन्होंने कहा कि यह केस लेकर हाईकोर्ट जाने में क्या समस्या है। वहां काबिल जज भी हैं और वकील भी। साथ ही कोर्ट ने याचिकाकर्ता से बार-बार सवाल उठाया कि वह हाईकोर्ट जाने के बजाय सीधे सुप्रीम कोर्ट क्यों आए हैं।

यह एक समुदाय को निशाना बनाने का मामला है

बता दें कि याचिकाकर्ता ने जब कहा कि यह एक समुदाय को निशाना बनाने का मामला है, पूरे देश का मुद्दा है और सुप्रीम कोर्ट को इसे सुनना चाहिए तो सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि यानी देश की हर घटना पर सुप्रीम कोर्ट ही सुनवाई करें। वहीं सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि अगर यह मामला इस अदालत में नहीं सुना जा सकता तो कोर्ट को अनुच्छेद 32 की सीमा निर्धारित करनी होगी। उन्होंने कहा कि वह इस मामले में एसआईटी गठित करने की मांग कर रहे हैं और यह जानना चाहते हैं कि एसआईटी असम के बॉस के खिलाफ क्या कर सकती है।

हाईकोर्ट जाने के बजाय सीधे सुप्रीम कोर्ट क्यों आए हैं

दरअसल, सीजेआई ने कहा कि वह राजनीतिक दलों से संयम बरतने और संवैधानिक नैतिकता की सीमाओं के भीतर रहने का आग्रह करेंगे, लेकिन यह एक नया चलन शुरू हो गया है कि जब भी किसी राज्य में चुनाव होता है, सुप्रीम कोर्ट राजनीति के युद्ध का मैदान बन जाता है। अभिषेक सिंघवी ने कहा कि हिमंत बिस्व सरमा बार-बार ऐसा कर रहे हैं और अनुच्छेद 32 की शक्ति के तहत सुनवाई के लिए यह एक आदर्श केस है। यहां बिलकिस रसूल और विनोद दुआ जैसे केस को सुप्रीम कोर्ट ने सीधे सुना है। इस पर सीजेआई ने कहा यह ऐसे मामले थे जहां लोगों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई हुई थी। यहां आप कार्रवाई की मांग रहे हैं, फिर अभिषेक सिंघवी ने कहा कि यह बड़े पद पर बैठे शख्स का मामला है। 

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