रहस्यों से भरे है जगन्नाथ मंदिर के 4 दरवाजे, जानें किस दरवाजे पर कौन से देवता का है वास?

Update: 2026-01-10 02:30 GMT

नई दिल्ली। पुरी ओडिशा का जगन्नाथ मंदिर भारत के सबसे प्रसिद्ध और रहस्यमय मंदिरों में से एक है। भगवान जगन्नाथ को भगवान विष्णु का रूप माना जाता है। ऐसे में जगन्नाथ मंदिर जितना पवित्र है, उतना ही रहस्यों से भरा भी।

जगन्नाथ मंदिर अपनी भव्यता और रथ यात्रा समेत कई चमत्कार और रहस्यों के लिए भी जाना जाता है।

जगन्नाथ मंदिर के इन्हीं रहस्यों में से एक मंदिर के 4 मुख्य द्वार भी है। मंदिर के चार दरवाजे 4 अलग-अलग दिशाओं में स्थित है। जगन्नाथ मंदिर के चार रहस्यमयी दरवाज़े - सिंह द्वार (पूर्व), व्याघ्र द्वार (पश्चिम), हस्ति द्वार (उत्तर), और अश्व द्वार (दक्षिण) - चार युगों (सतयुग, त्रेता, द्वापर, कलियुग) और धर्म, ज्ञान, वैराग्य व ऐश्वर्य जैसे जीवन के सिद्धांतों के प्रतीक हैं।

चारों द्वारों का रहस्य

 सिंह द्वार (पूर्व):

प्रतीक: मोक्ष (मुक्ति) और धर्म।

विशेषता: यह मंदिर का मुख्य प्रवेश द्वार है, जहां से प्रवेश करने पर भक्त को आध्यात्मिक मुक्ति मिलती है, ऐसा माना जाता है।

व्याघ्र द्वार (पश्चिम):

प्रतीक: धर्म और ज्ञान।

विशेषता: इस द्वार पर बाघ की मूर्ति है, जो सदाचार और नैतिक मूल्यों का पालन सिखाती है, साधु-संत अक्सर इस द्वार से प्रवेश करते हैं।

हस्ति द्वार (उत्तर):

प्रतीक: ऐश्वर्य (धन-संपत्ति) और ज्ञान।

विशेषता: हाथी, देवी लक्ष्मी का वाहन माना जाता है; नई मूर्तियों को बनाने के लिए पवित्र लकड़ियां (दारू) इसी द्वार से लाई जाती हैं।

अश्व द्वार (दक्षिण):

प्रतीक: काम (इच्छा) और विजय।

विशेषता: इस द्वार पर घोड़े हैं, जो युद्ध मुद्रा में जगन्नाथ और बलभद्र जी की सवारी करते दिखते हैं; इसे 'विजय द्वार' भी कहते हैं, जिसका उपयोग योद्धा विजय के लिए करते थे।

चार युगों से संबंध

माना जाता है कि ये चारों द्वार क्रमशः सतयुग, त्रेता युग, द्वापर युग और कलियुग का प्रतिनिधित्व करते हैं, जो समय के साथ मनुष्य की यात्रा को दर्शाते हैं। ये द्वार न केवल मंदिर के प्रवेश बिंदु हैं, बल्कि गहरे आध्यात्मिक अर्थों और सांस्कृतिक महत्व से जुड़े हैं, जो भक्तों को जीवन के विभिन्न पहलुओं और आध्यात्मिक लक्ष्यों का प्रतीक हैं।

मंदिर से जुड़े कुछ अन्य रहस्य

सिंह द्वार की ध्वनि: मंदिर के अंदर प्रवेश करते ही समुद्र की लहरों की आवाज़ सुनाई देना बंद हो जाती है।

हवा की दिशा: यहाँ मंदिर का ध्वज हमेशा हवा की विपरीत दिशा में लहराता है।

रसोई का रहस्य: मंदिर की रसोई में सात बर्तन एक के ऊपर एक रखे जाते हैं, जिसमें सबसे ऊपर वाले बर्तन का खाना सबसे पहले पकता है। 

Tags:    

Similar News