जिसे समझ रहे थे सब भिखारी वह तो निकला कुछ और ही... इंदौर के करोड़पति भिखारी मांगीलाल केस में नया ट्विस्ट
इंदौर। इंदौर के बहुचर्चित 'करोड़पति भिखारी' मांगीलाल के मामले में 20 जनवरी 2026 को एक नया मोड़ आया है। मांगीलाल ने खुद पर लगे आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए स्पष्ट किया है कि वह भिखारी नहीं है। भतीजे का दावा है कि जब मेरी उनसे मांगीलाल से आश्रय गृह में मुलाकात हुई, तो उन्होंने बताया कि वे भिखारी नहीं है। वहां (सर्राफा बाजार) पैसे वसूलने जाया करते थे और किसी गलतफहमी के कारण उनकी तस्वीरें भिखारी के रूप में प्रसारित हो गईं।
परिवार ने दी सफाई
मांगीलाल के परिवार ने सफाई देते हुए कहा है कि उनकी फोटो गलत तरीके से वायरल की गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह सराफा बाजार में भीख मांगने नहीं, बल्कि व्यापारियों से अपने ब्याज के पैसे वसूलने जाते थे। प्रशासन की जांच में पाया गया कि मांगीलाल के पास इंदौर में तीन मकान (भगत सिंह नगर में तीन मंजिला घर, शिव नगर में एक घर और अलवासा में एक फ्लैट) हैं। इसके अलावा, उनके पास तीन ऑटो-रिक्शा और एक स्विफ्ट डिजायर कार भी है, जिसके लिए उन्होंने ₹12,000 प्रति माह पर एक ड्राइवर रखा हुआ है।
आय का स्रोत
वह सराफा बाजार के छोटे व्यापारियों और आभूषण दुकानदारों को ऊंचे ब्याज पर पैसे उधार देने का काम करते हैं। अधिकारियों के अनुसार, उन्होंने करीब ₹4-5 लाख बाजार में उधार दे रखे हैं, जिससे उन्हें रोजाना ₹1,000 से ₹1,200 तक की कमाई होती है।
प्रशासनिक तर्क
महिला एवं बाल विकास विभाग का कहना है कि वे सराफा क्षेत्र में भीख मांगते हुए पाए गए थे और लोग सहानुभूतिवश उन्हें रोजाना ₹500 से ₹1,000 दे देते थे। मांगीलाल ने स्वीकार किया कि वह जबरदस्ती भीख नहीं मांगते थे, बल्कि लोग खुद उन्हें पैसे दे देते थे।
एनजीओ का पक्ष
भीख उन्मूलन के क्षेत्र में काम करने वाले एनजीओ 'प्रवेश' ने कहा कि मांगीलाल पहले राजमिस्त्री थे, लेकिन कुष्ठ रोग के कारण दिव्यांग होने के बाद उन्हें सामाजिक उपेक्षा का सामना करना पड़ा। फिलहाल, इंदौर प्रशासन उनकी संपत्तियों और आय के स्रोतों के दस्तावेजों की जांच कर रहा है। कलेक्टर ने स्पष्ट किया है कि तथ्यों के सत्यापन के बाद ही दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।