रामायण की यह अनसुनी कथा! जब हनुमान जी पर बाण चलाने से पहले घबरा गए थे भरत ? जानें पूरी कथा
नई दिल्ली। रामायण का हर कांड और घटना विशेष महत्व रखती है। सभी घटनाएं हमें कुछ ना कुछ सिखाती है। ये कथांए विवेक, करुणा और जिम्मेदारी का गहरा संदेश भी देती हैं। ऐसी ही एक कथा है, जब भगवान राम के भाई भरत ने अनजाने में हनुमान जी पर बाण चला दिया था। यह घटना केवल एक युद्ध प्रसंग नहीं, बल्कि पिता दशरथ की सीख और पुत्र भरत की चेतना का प्रतीक भी मानी जाती है।
क्या है पौराणिक कथा
भरत जी ने रात के आकाश में एक विशाल पर्वत को उड़ते हुए देखा। उन्हें लगा कि यह कोई मायावी राक्षस है जो अयोध्या पर हमला करने आ रहा है। अपनी प्रजा और नगर की रक्षा के लिए भरत जी ने बिना देर किए एक बिना फल (बिना नोक) वाला बाण चलाया ताकि उस 'राक्षस' को नीचे उतारा जा सके।
श्री राम का नाम सुनकर घबरा गए थे भरत जी
जैसे ही बाण हनुमान जी को लगा, वे "हा राम! हा लक्ष्मण!" कहते हुए मूर्छित होकर गिरने लगे। श्री राम का नाम सुनकर भरत जी बुरी तरह घबरा गए। उन्हें ग्लानि हुई कि उन्होंने अनजाने में अपने ही भाई के किसी प्रिय भक्त या दूत को घायल कर दिया है। जब हनुमान जी ने होश में आकर भरत जी को पूरी घटना और लक्ष्मण जी के शक्ति बाण लगने का समाचार सुनाया, तब भरत जी और भी विचलित हो गए। उन्होंने अपनी भूल सुधारने के लिए हनुमान जी को अपने बाण पर बैठकर तुरंत लंका पहुंचाने का प्रस्ताव भी दिया था [