वैशाख माह का कालाष्टमी व्रत आज, जानें पूजा का शुभ मुहूर्त और विधि

Update: 2026-04-10 01:30 GMT

नई दिल्ली। आज वैशाख माह की कालाष्टमी का व्रत रखा जा रहा है। यद्यपि अष्टमी तिथि 9 अप्रैल की रात से शुरू हो रही है, लेकिन उदयातिथि की मान्यताओं के अनुसार मुख्य व्रत और पूजन शुक्रवार को ही होगा। ऐसेेमं इस दिन का शुभ मुहूर्त और पूजा विधि के बारे में जानना जरूरी है।

शुभ मुहूर्त

अष्टमी तिथि आरंभ: 9 अप्रैल 2026, रात 09:19 बजे से

अष्टमी तिथि समाप्त: 10 अप्रैल 2026, रात 11:15 बजे तक

निशिता काल (पूजा का समय): काल भैरव की पूजा के लिए रात्रि का समय (निशिता काल) अत्यंत फलदायी माना जाता है, जो 9 अप्रैल और 10 अप्रैल दोनों रातों में प्रभावी रहेगा।

पूजा विधि 

- सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र पहनें। भगवान शिव और काल भैरव का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें।

- एक लकड़ी की चौकी पर लाल या काला कपड़ा बिछाकर बाबा काल भैरव, शिवजी और माता पार्वती की प्रतिमा स्थापित करें।

- भगवान के समक्ष सरसों के तेल या तिल के तेल का चौमुखी दीपक जलाएं।

- भैरव बाबा को फल, फूल, नारियल, इमरती और विशेष रूप से गेरुआ या मदिरा अर्पित करने की परंपरा है।

- शिव चालीसा या भैरव चालीसा का पाठ करें और आरती करें। मंत्र: "ॐ भ्रं कालभैरवाय फट्" का जाप करें।

-  कालाष्टमी के दिन काले कुत्ते को सरसों के तेल से चुपड़ी रोटी खिलाना बहुत शुभ माना जाता है, क्योंकि कुत्ता भैरव बाबा का वाहन है।

महत्व 

- कालाष्टमी का दिन भगवान शिव के रौद्र रूप 'काल भैरव' को समर्पित है।

-  इस दिन पूजन करने से अकाल मृत्यु का भय, नकारात्मक शक्तियां और मानसिक तनाव दूर होते हैं।

- मान्यता है कि यह व्रत शत्रुओं और जीवन की बाधाओं को नष्ट करने में सहायक होता है।

- शनि और राहु-केतु जैसे ग्रहों के अशुभ प्रभाव को कम करने के लिए भी कालाष्टमी व्रत फलदायी है।

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