अमेरिका-ईरान की वार्ता फेल, अधर में लटकी युद्धविराम पर बातचीत, जानें होर्मुज पर क्या फैसला होगा

अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता की गई। लेकिन अमेरिका और ईरान के बीच हुई खास बातचीत पूरी तरह से विफल हो गई है।

By :  Aryan
Update: 2026-04-12 05:56 GMT

नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में छिड़े संघर्ष को खत्म करने के लिए इस्लामाबाद में एक कूटनीतिक पहल की गई। जिसके तहत अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता की गई। लेकिन अमेरिका और ईरान के बीच हुई खास बातचीत पूरी तरह से विफल हो गई है। लोगों को इस मीटिंग से उम्मीद थी कि दोनों देशों के बीच तनाव कम होगा। जिससे होर्मुज स्ट्रेट को लेकर कोई समाधान निकलकर आएगा मगर अफसोस ऐसा हो नहीं हो सका। इस वार्ता के विफल हो जाने से पूरी दुनिया में चिंता बढ़ गई है।

 बातचीत टूटने का कारण

बैठक खत्म होने के बाद अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा कि हम किसी समझौते पर नहीं पहुंच पाए हैं। मुझे लगता है कि यह अमेरिका से अधिक ईरान के लिए बुरी खबर है। हमने इसे जितना हो सके उतना स्पष्ट कर दिया है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के अनुसार ईरान ने अमेरिका की शर्तें स्वीकार नहीं की।

ईरान का बयान

दूसरी तरफ ईरान का कहना है कि अमेरिका की मांगें बहुत ज्यादा थीं और वह उन पर सहमति नहीं दे सकता है। मतलब दोनों देश अपनी-अपनी शर्तों पर अड़े रहे और हल नहीं निकल पाया।

होर्मुज स्ट्रेट को लेकर फैसला

ईरान की ताकतवर सैन्य संस्था इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स ने साफ कर दिया है कि होर्मुज स्ट्रेट की स्थिति में किसी तरह का बदलाव नहीं होगा। इसका मतलब है कि 28 फरवरी से जो स्थिति बनी हुई है, जब इस रास्ते को लगभग बंद कर दिया गया था वह आगे भी देखने को मिल सकता है।

सीजफायर के दौरान तय किया गया था

दरअसल 8 अप्रैल को अमेरिका और ईरान के बीच दो हफ्तों का सीजफायर हुआ था। इस दौरान यह तय हुआ था कि हर दिन सीमित संख्या में, यानी करीब 15 जहाजों को होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने दिया जाएगा, लेकिन हालात अचानक बिगड़ गए। लेबनान पर हमले के बाद कुछ ही मिनटों में ईरान ने फिर से इस रास्ते को बंद कर दिया।

ईरान मिडिल ईस्ट में दबदबा बनाए रखना चाहता है

ईरान साफ तौर पर होर्मुज स्ट्रेट पर अपना नियंत्रण बनाए रखना चाहता है। ईरान का कहना है कि इस रास्ते पर पकड़ बनाए रखने से उसे मिडिल ईस्ट में दबदबा बनाए रखने में मदद मिलती है। इस वजह से ही उसने अपनी शर्तों में भी इसे शामिल किया था।

 गौरतलब है कि यदि  हालात जल्द नहीं सुधरे, तो यह संकट और बड़ा रूप भी ले सकता है

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