मुस्लिम महिलांए रोजा के दौरान पीरियड्स में नमाज पढ़ सकती हैं या नहीं, जानें कैसे की जाती है कजा...
इस्लाम में मासिक धर्म (पीरियड्स) के दौरान रोजा और नमाज के बारे में अलग नियम बताए गए हैं। ये नियम कुरान और हदीस की रोशनी में समझाए गए हैं।
नमाज (सलाह)
पीरियड्स के दौरान नमाज पढ़ना माफ (छूट) होता है।
इस समय महिला नमाज नहीं पढ़ती।
बाद में इन नमाज़ों की क़ज़ा (दोबारा पढ़ना) भी नहीं करनी पड़ती।
रोजा (सौम)
पीरियड्स के दौरान रोज़ा रखना भी माफ होता है।
लेकिन जो रोजे छूट जाते हैं, उन्हें बाद में कजा रखना पड़ता है (रमजान के बाद)।
कुरान और मस्जिद से जुड़े नियम
कुरान को सीधे हाथ से छूने से परहेज किया जाता है। मस्जिद में नमाज के लिए रुकना नहीं किया जाता। लेकिन जिक्र, दुआ, दरूद, तस्बीह करना बिल्कुल कर सकती हैं।
जब पीरियड्स खत्म हो जाएं
गुस्ल (पूरा स्नान) करने के बाद फिर से नमाज और रोजा शुरू किए जाते हैं। यह नियम हदीस में भी बताया गया है, कि
हमें पीरियड्स के दौरान छूटे हुए रोजो की कजा करने का हुक्म दिया जाता था, लेकिन नमाज की कजा का नहीं।