प्रह्लाद के पिता हिरण्यकशिपु को भगवान विष्णु से क्यों था द्वेष, जानें क्या है इसकी पौराणिक कथा
प्रह्लाद भगवान विष्णु के नरसिंह अवतार की भक्ति करते थे। हालांकि वे मूलतः श्रीहरि विष्णु के परम भक्त थे, लेकिन उनकी रक्षा के लिए भगवान ने नरसिंह अवतार धारण किया, इसलिए प्रह्लाद की भक्ति विशेष रूप से नरसिंह भगवान से जुड़ी मानी जाती है।
विस्तार से कथा
प्रह्लाद का जन्म और पारिवारिक पृष्ठभूमि
प्रह्लाद दैत्यराज हिरण्यकशिपु के पुत्र थे। हिरण्यकशिपु स्वयं को भगवान मानता था और चाहता था कि सब उसकी पूजा करें। वह भगवान विष्णु से घोर द्वेष रखता था क्योंकि विष्णु ने उसके भाई हिरण्याक्ष का वध किया था।
प्रह्लाद की भक्ति
बचपन से ही प्रह्लाद ॐ नमो भगवते वासुदेवाय का जप करते थे।
वे हर स्थान पर भगवान विष्णु को देखते थे।
उन्होंने अपने साथ पढ़ने वाले बालकों को भी विष्णु भक्ति का उपदेश दिया।
वे मानते थे कि ईश्वर सर्वत्र हैं।
हिरण्यकशिपु के अत्याचार
जब हिरण्यकशिपु को पता चला कि उसका पुत्र विष्णु भक्त है, तो उसने उसे अनेक यातनाएं दीं।
विषैले सर्पों के बीच डलवाया
हाथियों से कुचलवाने की कोशिश
पर्वत से गिरवाया
अग्नि में बैठाया (होलिका दहन कथा)
लेकिन हर बार भगवान विष्णु ने उसकी रक्षा की।
नरसिंह अवतार का प्रकट होना
एक दिन हिरण्यकशिपु ने क्रोधित होकर पूछा
कहां है तेरा भगवान तो प्रह्लाद ने उत्तर दिया कि भगवान सर्वत्र हैं।
तभी भगवान नरसिंह (आधा मनुष्य, आधा सिंह) खंभे से प्रकट हुए और संध्या समय, दहलीज पर, अपने नखों से हिरण्यकशिपु का वध किया। इस प्रकार ब्रह्मा से मिले वरदान की सभी शर्तें भी पूरी रहीं।
आध्यात्मिक अर्थ
प्रह्लाद अटल श्रद्धा और सच्ची भक्ति के प्रतीक हैं।
नरसिंह अवतार यह दर्शाता है कि भगवान अपने भक्तों की रक्षा के लिए किसी भी रूप में आ सकते हैं। सच्ची भक्ति में भय नहीं होता।