प्यार में कब तक होती है एक दूसरे से मिलने की बेचैनी! जानें हनीमून फेज में फील-गुड हार्मोन्स का स्तर क्यों होता है ऊंचा
प्यार में एक-दूसरे से मिलने की बेचैनी कब तक रहती है, यह हर रिश्ते की गहराई और स्वभाव पर निर्भर करता है, लेकिन आमतौर पर इसके कुछ चरण होते हैं। हालांकि "पागलपन वाली बेचैनी" अक्सर शुरुआती कुछ समय तक रहती है, लेकिन मिलने की "मीठी चाहत" हमेशा रह सकती है।
शुरुआती दौर (हनीमून फेज)
रिश्ते के पहले 6 महीने से 2 साल तक यह बेचैनी सबसे ज्यादा होती है। इस दौरान दिमाग में 'डोपामाइन' और 'ऑक्सीटोसिन' जैसे फील-गुड हार्मोन्स का स्तर बहुत ऊंचा होता है, जिससे हर पल साथ रहने की तीव्र इच्छा होती है।
लॉन्ग डिस्टेंस रिलेशनशिप
अगर पार्टनर दूर हो, तो यह तड़प और बेचैनी सालों तक वैसी ही बनी रह सकती है क्योंकि शारीरिक निकटता की कमी उस 'प्यास' को कम नहीं होने देती।
परिपक्वता (मैच्योरिटी)
समय के साथ जब रिश्ता गहरा और सुरक्षित हो जाता है, तो बेचैनी की जगह सुकून और भरोसे ले लेते हैं। तब आप साथ न होकर भी एक-दूसरे से जुड़ा हुआ महसूस करते हैं।
भावनात्मक जुड़ाव
अगर प्यार गहरा है, तो मिलने की एक हल्की सी चाहत और खुशी उम्र भर बनी रहती है, भले ही वह शुरुआती दौर जैसी "बेचैनी" न रहे।