जकात को रमजान के दौरान अदा करना क्यों माना जाता है खास, जानें क्या है वजह
जकात किसे कहते हैं।
रमजान में रोजा, नमाज और कुरआन पढ़ने के साथ जकात और फितरा देने का भी बहुत महत्व है। जकात इस्लाम के 5 स्तंभों में से एक है। रमजान के महीने में ईद की नमाज से पहले फितरा और जकात देना हर हैसियतमंद मुसलमान का फर्ज होता है।
शरीयत में जकात उस माल को कहते हैं जिसे इंसान अल्लाह के दिए हुए माल में से उसके हकदारों के लिए निकालता है।
जकात हर साल फर्ज है, लेकिन रमजान में उसे अदा करना खास माना जाता है। इसकी कुछ अहम वजहें हैं।
1. रमजान बरकत और रहमत का महीना है
रमज़ान को अल्लाह की रहमत और मगफिरत (माफी) का महीना कहा गया है। इसी महीने में कुरान नाजिल हुआ यानी लिखा गया।
इस महीने में हर नेकी का सवाब कई गुना बढ़ा दिया जाता है। दुआएं ज्यादा क़ुबूल होती हैं। दिलों में नरमी और हमदर्दी बढ़ती है। इसलिए ज़कात देने का सवाब भी ज्यादा हो जाता है।
2. रोजा हमें गरीबों का एहसास कराता है
रोजा रखने से इंसान भूख-प्यास महसूस करता है। इससे गरीबों और जरूरतमंदों की तकलीफ समझ में आती है।
रमजान में जकात देने से गरीबों की ईद की तैयारी में मदद होती है। समाज में बराबरी और मोहब्बत बढ़ती है
3. नबी की सुन्नत
हदीस में आता है कि मुहम्मद रमजान में बहुत ज्यादा सखावत (दान) करते थे। इसलिए मुसलमान उनकी सुन्नत पर अमल करते हुए रमजान में ज्यादा दान देते हैं।
4. जरूरतमंदों की जरूरत ज्यादा होती है
रमजान और ईद के दिनों में खाने-पीने का खर्च बढ़ता है। कपड़ों और जरूरतों का खर्च होता है। जकात देने से गरीब भी ईद की खुशियों में शामिल हो पाते हैं।
अहम बात
जकात सिर्फ रमजान में देना जरूरी नहीं है।
अगर आपका साल किसी और महीने में पूरा होता है, तो उसी समय देना फर्ज है।