नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की चर्चाओं के बीच JDU के सोशल मीडिया पोस्ट ने बीजेपी की बढ़ाई टेंशन! राजद ने कसा तंज
पटना। होली के दिन बिहार के सियासत में सीएम नीतीश कुमार को लेकर जमकर चर्चा हुई है। सियासी हलकों में अटकल बाजियों का दौर निकल पड़ा। चर्चा होने लगी कि राज्यसभा चुनाव के जरिए सीएम नीतीश कुमार केंद्र की राजनीति में जा सकते हैं। हालांकि, अभी इसकी पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन सोशल मीडिया और जारी इन कयासों को जदयू के एक सोशल मीडिया पोस्ट ने बड़ा झटका दे दिया।
राज्यसभा जाने की चर्चा के बीच क्या बोली नीतीश कुमार की JDU?
जनता दल यूनाइटेड के आधिकारिक एक्स अकाउंट से पोस्ट कर लिखा कि मुख्यमंत्री वृद्धजन पेंशन योजना आज लाखों वृद्धजनों के लिए सहारे और सम्मान का पर्याय बन चुकी है। आज प्रत्येक पात्र वृद्ध को राज्य सरकार की ओर से ₹1100 मासिक पेंशन दी जा रही है। सम्मान और सामाजिक सुरक्षा की यह गारंटी माननीय नीतीश कुमार जी के नेतृत्व में नीतीश सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
JDU के कार्यकर्ताओं में भारी नाराजगी
नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की चर्चा के बीच जदयू के कार्यकर्ता सीएम आवास के बाहर जुट गए हैं। जदयू कार्यकर्ताओं में काफी नाराजगी देखी जा रही है। जेडीयू कार्यकर्ताओं का कहना है कि षड्यंत्र के तहत नीतीश कुमार को बिहार की राजनीति से दूर किया जा रहा है। शराब माफिया और जेडीयू के कुछ नेता सीएम नीतीश के खिलाफ षड्यंत्र कर रहे हैं। नीतीश कुमार अगर दिल्ली गए तो बिहार में महिला और उनके प्रशंसक जन आंदोलन करेंगे।
'ऑपरेशन लोटस के तहत बीजेपी ने रची साजिश'- RJD
आरजेडी के शक्ति सिंह यादव का कहना है कि हमारा पुख्ता दावा है कि बीजेपी ने साइलेंट ऑपरेशन लोटस चलाकर नीतीश कुमार को पूरी तरह से घेर लिया है। उन्हें डरा-धमका कर जबरन राज्यसभा भेजा जा रहा है, ताकि कल को बीजेपी यह झूठा नैरेटिव गढ़ सके कि उन्होंने स्वेच्छा से पद छोड़ा। सत्ता हथियाने के लिए यह भाजपा का सबसे बड़ा और घृणित षड्यंत्र है, जिसमें मुख्यमंत्री को मोहरा बना दिया गया है।
इतिहास का सबसे शर्मनाक राजनीतिक अपहरण
राजद नेता का यह भी कहना है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार आज पूरी तरह से लाचार और बेबस हो चुके हैं। भारी मन से उन्होंने अपने करीबियों को बता दिया है कि मैं घिर चुका हूं, मेरी कुछ नहीं चल रही, मजबूरी में नॉमिनेशन कर रहा हूं वरना मेरे साथ कुछ भी हो सकता है। पूरी जदयू आज खौफ और मायूसी के दौर से गुजर रही है। यह एनडीए नहीं, बल्कि बिहार के इतिहास का सबसे शर्मनाक राजनीतिक अपहरण है।