आखिर रमजान में खजूर खाकर ही क्यों तोड़ा जाता है रोजा, जानिए इसका क्या है असली उद्देश्य

Update: 2026-02-18 02:30 GMT

नई दिल्ली। रमजान के पवित्र महीने में खजूर से रोजा खोलना न केवल एक धार्मिक परंपरा है, बल्कि इसके पीछे गहरे वैज्ञानिक और आध्यात्मिक कारण भी छिपे हैं।

खजूर से रोजा खोलने के मुख्य कारण

धार्मिक महत्व (सुन्नत): इस्लाम में खजूर से रोजा खोलना 'सुन्नत' (पैगंबर मोहम्मद की परंपरा) माना जाता है। मान्यता है कि पैगंबर मोहम्मद अपना रोजा अक्सर खजूर और पानी से ही खोलते थे।

त्वरित ऊर्जा: दिनभर भूखे-प्यासे रहने के बाद शरीर में ग्लूकोज का स्तर गिर जाता है। खजूर में मौजूद प्राकृतिक शर्करा (ग्लूकोज, फ्रुक्टोज और सुक्रोज) शरीर को तुरंत ऊर्जा प्रदान करती है और थकान दूर करती है।

पाचन के लिए सुपाच्य: लंबे उपवास के बाद पेट बहुत संवेदनशील होता है। खजूर हल्का और आसानी से पचने वाला फल है, जो पाचन तंत्र को भारी भोजन के लिए धीरे-धीरे तैयार करता है।

पोषक तत्वों का खजाना: खजूर फाइबर, पोटेशियम, मैग्नीशियम और विटामिन से भरपूर होता है, जो शरीर में इलेक्ट्रोलाइट संतुलन बनाए रखने और कब्ज जैसी समस्याओं को रोकने में मदद करता है।

रमजान में फास्टिंग (रोजा) का असली उद्देश्य

रमजान केवल भूखे रहने का नाम नहीं है, इसके आध्यात्मिक उद्देश्य कहीं अधिक गहरे हैं:

तक्वा (आत्म-संयम और ईश-भय): रोजे का मुख्य उद्देश्य 'तक्वा' प्राप्त करना है, जिसका अर्थ है आत्म-अनुशासन विकसित करना और अल्लाह की इच्छा के अनुसार जीवन जीना।

आध्यात्मिक शुद्धि: यह महीना आत्मा की शुद्धि, प्रार्थना (इबादत) और कुरान के पाठ के माध्यम से ईश्वर के करीब आने का समय है।

समानुभूति और दान: भूखा रहकर एक रोजेदार उन गरीबों और जरूरतमंदों के दर्द को महसूस करता है जिनके पास भोजन नहीं है। इससे मन में दया और दान (जकात) करने की भावना प्रबल होती है।

बुरी आदतों का त्याग: रोजा व्यक्ति को झूठ बोलने, गुस्सा करने और अन्य नैतिक बुराइयों से दूर रहने की शिक्षा देता है, जिससे चरित्र निर्माण होता है। 

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