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गर्दन पर बिना निशान: मैक्स वैशाली में हुई भारत की दुर्लभ अत्याधुनिक रोबोटिक थायरॉयड कैंसर सर्जरी से 60 वर्षीय महिला को नया जीवन

गाजियाबाद। थायरॉयड कैंसर आज तेजी से बढ़ती गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं में शामिल है। इसके इलाज में सर्जरी एक अहम भूमिका निभाती है, लेकिन अधिकतर मरीजों के लिए सबसे बड़ी चिंता गर्दन पर पड़ने वाला स्थायी निशान होता है, जो शारीरिक के साथ-साथ मानसिक और सामाजिक असहजता भी पैदा करता है। ऐसे में मैक्स इंस्टीट्यूट ऑफ कैंसर केयर, वैशाली ने चिकित्सा क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए भारत की अत्यंत दुर्लभ रोबोटिक स्कारलेस थायरॉयड कैंसर सर्जरी को सफलतापूर्वक अंजाम दिया है।
थायरॉयड कैंसर से राहत मिली
इस उन्नत सर्जरी के माध्यम से गाजियाबाद निवासी 60 वर्षीय महिला मरीज उषा को बिना गर्दन पर किसी भी निशान के थायरॉयड कैंसर से राहत मिली और उन्हें एक नया जीवन मिला। यह सर्जरी रोबोट-असिस्टेड स्कारलेस टोटल थायरॉयडेक्टॉमी विद सेंट्रल नेक डिसेक्शन (CND) तकनीक से की गई, जिसे तकनीकी रूप से अत्यंत जटिल माना जाता है। पूरे भारत में केवल 12 से 15 अनुभवी सर्जन ही इस अत्याधुनिक प्रक्रिया को सुरक्षित रूप से करने में सक्षम हैं। मैक्स इंस्टीट्यूट ऑफ कैंसर केयर, वैशाली में इस सर्जरी की सफलता ने संस्थान को रोबोटिक कैंसर सर्जरी के क्षेत्र में एक विशिष्ट पहचान दिलाई है।
आत्मविश्वास को प्राथमिकता दी जाती है
मरीज उषा को जब थायरॉयड कैंसर का पता चला, तब उन्हें बीमारी से अधिक चिंता गर्दन पर पड़ने वाले स्थायी निशान को लेकर थी। पारंपरिक सर्जरी में गर्दन पर बड़ा चीरा लगाना पड़ता है, जबकि रोबोटिक स्कारलेस तकनीक में मरीज की जीवन गुणवत्ता और आत्मविश्वास को प्राथमिकता दी जाती है। यह सर्जरी Da Vinci Xi रोबोटिक सिस्टम की सहायता से ट्रांसएक्सिलरी (बगल के रास्ते) की गई, जिससे गर्दन पर किसी भी प्रकार का चीरा नहीं लगाया गया। सर्जरी के दौरान बगल में दिया गया छोटा सा चीरा समय के साथ लगभग पूरी तरह अदृश्य हो जाता है।
रोबोटिक स्कारलेस सर्जरी के प्रमुख लाभ
कम दर्द और न्यूनतम रक्तस्राव
तेज रिकवरी और कम अस्पताल प्रवास
उच्च सटीकता और बेहतर सर्जिकल सुरक्षा
गर्दन पर कोई बाहरी निशान नहीं
इस दुर्लभ और ऐतिहासिक सर्जरी का नेतृत्व डॉ. सीमा सिंह, एसोसिएट डायरेक्टर, रोबोटिक ऑनकोसर्जरी (ब्रेस्ट एवं गायनी यूनिट), मैक्स इंस्टीट्यूट ऑफ कैंसर केयर, वैशाली ने किया। डॉ. सीमा सिंह वर्ष 2010 से सर्जिकल ऑन्कोलॉजी के क्षेत्र में सक्रिय हैं। उन्होंने IMS, बीएचयू से MBBS एवं MS (जनरल सर्जरी) की पढ़ाई की, जहां वे MS गोल्ड मेडलिस्ट रहीं। इसके बाद उन्होंने AIIMS, नई दिल्ली से MCh (सर्जिकल ऑन्कोलॉजी) की उच्च विशेषज्ञता प्राप्त की।
हर सर्जन के लिए संभव नहीं
डॉ. सीमा सिंह के अनुसार, “रोबोटिक स्कारलेस थायरॉयड सर्जरी तकनीकी रूप से बेहद चुनौतीपूर्ण होती है और हर सर्जन के लिए संभव नहीं है। सही प्रशिक्षण और अनुभव के साथ यह तकनीक मरीजों को कम दर्द, बेहतर रिकवरी और बिना निशान के इलाज का अवसर देती है। हमारा उद्देश्य केवल कैंसर का इलाज करना नहीं, बल्कि मरीज को बेहतर जीवन गुणवत्ता देना है।”
मरीज-अनुकूल बनाने में सहायक सिद्ध होगी
इस सर्जरी की सफलता में अनुभवी सर्जिकल टीम, एनेस्थीसिया विशेषज्ञों, नर्सिंग स्टाफ और तकनीकी टीम का महत्वपूर्ण योगदान रहा। बेहतर समन्वय और उच्च विशेषज्ञता के कारण यह जटिल प्रक्रिया पूरी तरह सुरक्षित रूप से संपन्न हुई। विशेषज्ञों का मानना है कि यह उपलब्धि भारत में रोबोटिक कैंसर सर्जरी के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है, जो भविष्य में थायरॉयड सहित अन्य कैंसरों के इलाज को अधिक सुरक्षित, प्रभावी और मरीज-अनुकूल बनाने में सहायक सिद्ध होगी।




