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सांसों की घुटन के बाद अब पानी पर मंडराए संकट के बादल! CGWB ने दिल्ली, यूपी, पंजाब समेत कई अन्य राज्यों को किया अलर्ट जारी

Aryan
30 Nov 2025 12:43 PM IST
सांसों की घुटन के बाद अब पानी पर मंडराए संकट के बादल! CGWB ने दिल्ली, यूपी, पंजाब समेत कई अन्य राज्यों को किया अलर्ट जारी
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राजधानी दिल्ली में 86 स्थानों से भूजल के नमूने लिए गए, जिनमें से कई नमूनों में प्रदूषण का स्तर भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) द्वारा तय किए गए सुरक्षित पेयजल मानकों से काफी अधिक पाया गया।

नई दिल्ली। उत्तर भारत पहले से ही प्रदूषित हवा की वजह से गंभीर संकट झेल रहा ह। अब केंद्रीय भूजल बोर्ड की नई वार्षिक भूजल गुणवत्ता वाली रिपोर्ट ने साफ पानी पर मंडराते हुए संकट के बादल की चेतावनी दे दी है। रिपोर्ट के अनुसार, देशभर से एकत्र किए गए पानी के नमूनों में 13 से 15% में यूरेनियम पाया गया है। बता दें कि यह रिपोर्ट पूरे भारत से जुटाए गए 15,000 पानी के नमूनों पर आधारित है।

दिल्ली में कई जगह भारतीय मानक ब्यूरो से अधिक प्रदूषण

जानकारी के अनुसार, राजधानी में 86 स्थानों से भूजल के नमूने लिए गए, जिनमें से कई नमूनों में प्रदूषण का स्तर भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) द्वारा तय किए गए सुरक्षित पेयजल मानकों से काफी अधिक पाया गया। विश्लेषण के मुताबिक कुल 83 नमूनों में से 24 नमूने ऐसे थे जिनमें यूरेनियम की मात्रा खतरनाक स्तर तक अधिक पाई गई। यह संख्या कुल नमूनों का लगभग 13.35% से 15.66% भाग है।

भूजल स्तर में गिरावट और भू-वैज्ञानिक कारण

केंद्रीय भूजल बोर्ड ने कहा कि भूजल में यूरेनियम की मात्रा सबसे अधिक उत्तर-पश्चिम भारत में पाई गई है। जिनमें पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान के कुछ हिस्से और उत्तर प्रदेश शामिल हैं। इसकी वजह भू-वैज्ञानिक कारण, भूजल स्तर में कमी और अन्य कारक होने की संभावना हैं।

राज्यों की ग्राउंडवॉटर क्वालिटी में खतरे का प्रतिशत

उत्तर प्रदेश

EC ज्यादा: कम (2.33%)

फ्लोराइड: हल्का खतरा (4.05%)

नाइट्रेट: कई जगह अलर्ट

आर्सेनिक/मैंगनीज: कुछ जिलों में ज्यादा

सिंचाई खतरा: 13.65% नमूने RSC लिमिट से ऊपर

उत्तराखंड

EC: 0%, कोई समस्या नहीं

फ्लोराइड: 1.21%, बहुत कम

RSC: 41.94%, सिंचाई में सोडियम बढ़ने का खतरा सबसे ज्यादा

बिहार

EC: 0.86%, नगण्य

फ्लोराइड: 6.68%, मध्यम समस्या

नाइट्रेट: उच्च

गंगा बेसिन क्षेत्र में आर्सेनिक एक बड़ी चुनौती

कुछ जगह SAR 505 तक, सिंचाई के लिए बेहद नुकसानदेह

दिल्ली NCR

EC: 33.33%, खारा पानी बहुत ज्यादा

फ्लोराइड: 17.78%, गंभीर

SAR: 34.8% नमूने खराब

RSC: 51.11%, देश में सिंचाई का सबसे ज्यादा खतरा।

महाराष्ट्र

EC: 2.56%, हल्का खतरा

फ्लोराइड: 1.79%

लोकल नाइट्रेट और हेवी मेटल अलर्ट

राजस्थान

EC: 47.12% — देश में सबसे ज्यादा

फ्लोराइड: 41.06%, खतरनाक

नाइट्रेट और यूरेनियम: उच्च

SAR > 26: 12%

RSC ज्यादा: 24.42%

यह भारत के सबसे संकटग्रस्त ग्राउंडवॉटर वाले राज्यों में एक है।

मध्य प्रदेश

EC: 0.83%

फ्लोराइड: 0.96%

नाइट्रेट: कुछ अलर्ट

कुल मिलाकर स्थिति ठीक

हरियाणा

EC: 20.59%, खारापन बढ़ता हुआ

फ्लोराइड: 21.82%, बड़ी समस्या

नाइट्रेट: अलर्ट

यूरेनियम: कई हॉटस्पॉट

RSC: 15.54%, सिंचाई में जोखिम

पंजाब

EC: 7.01%

फ्लोराइड: 11.24%

नाइट्रेट और यूरेनियम: कई गंभीर जगहें

RSC: 24.60%

झारखंड

EC: कम

फ्लोराइड: 3.94%

नाइट्रेट व ट्रेस मेटल: छोटे स्पॉट

गुजरात

EC: 18.28%, खासकर तटीय व सूखे क्षेत्र

फ्लोराइड: 9.06%

यूरेनियम हॉटस्पॉट भी दर्ज

छत्तीसगढ़

EC: 0.12%, लगभग नहीं

फ्लोराइड: 2.65%

पानी की गुणवत्ता कुल मिलाकर अच्छी

हिमाचल प्रदेश

EC: सामान्य

फ्लोराइड: 1.24%

पानी अधिकतर BIS मानकों के अनुरूप

जम्मू-कश्मीर

EC: सामान्य

फ्लोराइड: समस्या नहीं

ग्राउंडवॉटर क्वालिटी बहुत अच्छी

इलेक्ट्रिकल कंडक्टिविटी

इलेक्ट्रिकल कंडक्टिविटी पानी की इलेक्ट्रिक करंट कंडक्ट करने की क्षमता को मापती है, जो पानी में घुले हुए आयन पर निर्भर करती है।

सोडियम एड्सॉर्प्शन रेशियो

सोडियम एड्सॉर्प्शन रेशियो एक कैलकुलेटेड वैल्यू है जो पानी में कैल्शियम और मैग्नीशियम के मुकाबले सोडियम का रिलेटिव प्रोपोर्शन दिखाता है।

रेसिडुअल सोडियम कार्बोनेट

रेसिडुअल सोडियम कार्बोनेट पानी में कैल्शियम और मैग्नीशियम आयन के रिलेटिव कार्बोनेट और बाइकार्बोनेट आयन के कंसंट्रेशन का अंतर है।

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