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सावधान! स्पॉन्डिलाइटिस को न करें नजरअंदाज वरना पड़ सकता है मंहगा, जानें इसके लक्षण और बचाव के उपाय

नई दिल्ली। स्पॉन्डलिटिस रीढ़ (स्पाइन) की हड्डियों और जोड़ों में होने वाली सूजन (inflammation) को कहते हैं। इससे गर्दन, कमर या पीठ में दर्द, जकड़न और चलने-फिरने में दिक्कत हो सकती है। स्पॉन्डिलाइटिस रीढ़ की हड्डी में सूजन पैदा करने वाला एक गठिया (Arthritis) है, जो मुख्य रूप से गर्दन और पीठ के निचले हिस्से में लंबे समय तक दर्द और अकड़न का कारण बनता है। यह स्थिति कशेरुकाओं (vertebrae) को प्रभावित करती है जिससे लचीलापन कम हो जाता है और कभी-कभी हड्डियां आपस में जुड़ सकती हैं। इसके इलाज में दवा, फिजियोथेरेपी और कसरत शामिल हैं।
मुख्य प्रकार
सर्वाइकल स्पॉन्डलिटिस – गर्दन के हिस्से में
लम्बर स्पॉन्डलिटिस – कमर के निचले हिस्से में
एंकायलोज़िंग स्पॉन्डलिटिस – एक ऑटोइम्यून बीमारी, जिसमें रीढ़ के जोड़ आपस में सख्त हो सकते हैं
लक्षण (Symptoms)
गर्दन अथवा कमर में लगातार दर्द रहना
सुबह के समय ज्यादा जकड़न
कंधे, हाथ या पैरों में झनझनाहट
सिरदर्द (खासकर सर्वाइकल में)
लंबे समय तक बैठने या झुकने में तकलीफ होना
अगर दर्द 3–4 हफ्तों से ज्यादा रहे या पैरों में कमजोरी लगे अथवा सुन्न हो जाए तो डॉक्टर से मिलना जरूरी है।
कारण (Causes)
गलत बैठने की आदत (लंबे समय तक मोबाइल और कंप्यूटर का इस्तेमाल करना)
बढ़ती उम्र में डिस्क का घिसना
चोट या भारी वजन उठाना
आनुवंशिक कारण (खासकर एंकायलोजिंग स्पॉन्डलिटिस में)
बचाव के तरीके (Prevention & Care)
सही पॉश्चर रखें
कुर्सी पर सीधे बैठें, पीठ को सपोर्ट दें
मोबाइल को आंखों के स्तर पर रखें
हर 30–40 मिनट में उठकर स्ट्रेच करें
नियमित व्यायाम
हल्की स्ट्रेचिंग
योगासन जैसे भुजंगासन, मार्जरी-व्यायाम (कैट-काउ) करें।
तैराकी और वॉकिंग बहुत लाभकारी होता है।
वजन नियंत्रित रखें
अधिक वजन रीढ़ पर दबाव बढ़ाता है। संतुलित आहार और नियमित गतिविधि मदद करती है।
सही गद्दा और तकिया का उपयोग करें
बहुत मुलायम गद्दा न लें
गर्दन के अनुसार मध्यम ऊंचाई का तकिया इस्तेमाल करें
दवा और फिजियोथेरेपी
दर्द होने पर डॉक्टर की सलाह से दवा लें
फिजियोथेरेपी से मांसपेशियां मजबूत होती हैं
डॉक्टर से कब मिलें?
पैरों में कमजोरी होने पर
पेशाब या मल पर नियंत्रण में समस्या होने पर
बुखार के साथ पीठ दर्द हो
यदि अचानक तेज असहनीय दर्द होने लगे




