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माइग्रेन बढ़ने से क्या हाई बीपी का होता है खतरा ? महिलाओं को किन बातों का रखना चाहिए ख्याल

तनाव और बदलती लाइफस्टाइल के कारण माइग्रेन और हाई बीपी (Hypertension) का गहरा संबंध देखा गया है। चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, माइग्रेन के तीव्र हमलों के दौरान शरीर में 'स्ट्रेस रिस्पॉन्स' सक्रिय हो जाता है, जो सीधे तौर पर रक्तचाप को प्रभावित करता है।
क्या माइग्रेन से हाई बीपी का खतरा है?
हां, इन दोनों के बीच एक द्विपक्षीय (Two-way) संबंध है।
अस्थायी वृद्धि
माइग्रेन के तेज दर्द के दौरान शरीर में कोर्टिसोल और एड्रेनालाईन जैसे हार्मोन बढ़ जाते हैं, जिससे हृदय गति और बीपी में अस्थायी बढ़ोतरी होती है।
दीर्घकालिक जोखिम
शोध बताते हैं कि जिन महिलाओं को 'ऑरा' (Aura) वाला माइग्रेन (जिसमें रोशनी दिखना या झुनझुनी होना शामिल है) होता है, उनमें भविष्य में स्ट्रोक और स्थायी हाई बीपी का खतरा अधिक होता है।
उल्टा प्रभाव
हाई बीपी भी माइग्रेन के लक्षणों को और अधिक गंभीर और असहनीय बना सकता है।
महिलाओं के लिए विशेष ध्यान देने योग्य बातें
सांख्यिकीय रूप से माइग्रेन महिलाओं में अधिक पाया जाता है। मेयो क्लीनिक (Mayo Clinic) के अनुसार, महिलाओं को इन 4 बातों का विशेष ख्याल रखना चाहिए।
हार्मोनल बदलाव
पीरियड्स, गर्भावस्था या मेनोपॉज के दौरान एस्ट्रोजन का स्तर गिरने से माइग्रेन ट्रिगर होता है। इस दौरान बीपी की नियमित जांच जरूरी है।
गर्भनिरोधक गोलियां (OCP)। यदि आपको ऑरा वाला माइग्रेन है, तो गर्भनिरोधक गोलियां लेने से पहले डॉक्टर से सलाह लें, क्योंकि यह स्ट्रोक के जोखिम को बढ़ा सकती हैं।
मैग्नीशियम और हाइड्रेशन
महिलाओं में अक्सर मैग्नीशियम की कमी देखी जाती है। अपने आहार में नट्स, बीज और पर्याप्त पानी शामिल करें।
नींद का चक्र
नींद की कमी माइग्रेन और हाई बीपी दोनों का सबसे बड़ा कारण है। एक निश्चित समय पर सोने की आदत डालें।
बचाव के उपाय
बीपी डायरी
यदि आपको अक्सर माइग्रेन होता है, तो महीने में कम से कम 4 बार अपना बीपी चेक करें और रिकॉर्ड रखें।
ट्रिगर की पहचान
अत्यधिक कैफीन, तेज रोशनी या तेज गंध से बचें।
तनाव प्रबंधन
योग और प्राणायाम माइग्रेन की फ्रीक्वेंसी को 30-40% तक कम कर सकते हैं।




