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प्रोटीन की अधिक मात्रा हमारे शरीर को कैसे करती है प्रभावित, जानें इसके नुकसान

Aryan
8 April 2026 5:38 PM IST
प्रोटीन की अधिक मात्रा हमारे शरीर को कैसे करती है प्रभावित, जानें इसके नुकसान
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जब हम प्रोटीन खाते हैं, तो शरीर इसे तोड़ता है और इस प्रक्रिया में नाइट्रोजन युक्त अपशिष्ट पैदा होता है।

नई दिल्ली। बहुत अधिक प्रोटीन खाने से किडनी खराब हो जाती है, लेकिन स्वस्थ लोगों के लिए यह पूरी तरह सच नहीं है। हालांकि, प्रोटीन का अत्यधिक सेवन किडनी पर दबाव डाल सकता है, खासकर यदि पहले से ही किडनी से जुड़ी कोई समस्या हो।

किडनी के लिए प्रोटीन के प्रभाव को समझने के लिए निम्नलिखित बिंदुओं पर ध्यान दें:

1. अत्यधिक कार्यभार (Hyperfiltration)

जब हम प्रोटीन खाते हैं, तो शरीर इसे तोड़ता है और इस प्रक्रिया में नाइट्रोजन युक्त अपशिष्ट (Nitrogen waste) पैदा होता है। किडनी का काम इस कचरे को खून से छानकर बाहर निकालना है। बहुत ज्यादा प्रोटीन खाने से किडनी को इसे साफ करने के लिए अधिक मेहनत करनी पड़ती है, जिसे मेडिकल भाषा में 'हाइपरफिल्ट्रेशन' कहा जाता है।

2. किडनी स्टोन का खतरा

प्रोटीन की बहुत अधिक मात्रा मूत्र में कैल्शियम के स्तर को बढ़ा सकती है और साइट्रेट (जो पत्थर बनने से रोकता है) को कम कर सकती है। इससे किडनी में पथरी (Stone) बनने की संभावना बढ़ जाती है।

3. पहले से मौजूद बीमारियों में जोखिम

अगर किसी व्यक्ति को डायबिटीज (मधुमेह), हाई ब्लड प्रेशर या पहले से ही क्रोनिक किडनी डिजीज (CKD) है, तो उनके लिए हाई-प्रोटीन डाइट काफी नुकसानदेह हो सकती है। ऐसी स्थिति में किडनी अतिरिक्त भार नहीं झेल पाती और उसकी कार्यक्षमता तेजी से घटने लगती है।

4. पानी की कमी (Dehydration)

प्रोटीन के पाचन के दौरान शरीर को जहरीले तत्वों को बाहर निकालने के लिए अधिक पानी की जरूरत होती है। यदि कोई व्यक्ति पर्याप्त पानी नहीं पीता, तो किडनी पर दबाव और भी बढ़ जाता है।

सामान्य सलाह:

स्वस्थ व्यक्ति:

एक सामान्य स्वस्थ व्यक्ति के लिए आमतौर पर 0.8 से 1 ग्राम प्रोटीन प्रति किलोग्राम वजन (जैसे 60 किलो वजन पर 60 ग्राम प्रोटीन) सुरक्षित माना जाता है।

जिम जाने वाले लोग:

सप्लीमेंट या व्हे प्रोटीन लेने से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें, क्योंकि इनका गलत या अत्यधिक उपयोग किडनी पर दबाव डाल सकता है।

पशु प्रोटीन:

रेड मीट जैसे पशु स्रोतों से मिलने वाला प्रोटीन किडनी पर अधिक दबाव डालता है, जबकि दालों या पौधों से मिलने वाला प्रोटीन तुलनात्मक रूप से सुरक्षित माना जाता है।

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