प्रेमानंद महाराज जी के दरबार में पहुंचा भक्त, कहा- छोटी जाति से हूं... महाराज जी ने दिया ऐसा जवाब सुनकर कहेंगे वाह!
वृंदावन। वृंदावन के प्रसिद्ध संत श्री हित प्रेमानंद गोविंद शरण जी महाराज के पास जब भी कोई भक्त जाता है तो उनकी सीख और बातें सभी का मन मोह लेती है। ऐसा ही एक मामला फिर हुआ जब एक भक्त ने खुद को 'नीच कुल' या 'छोटी जाति' का बताया, तो महाराज जी ने उसे बीच में रोकते हुए बहुत ही गहरा आध्यात्मिक संदेश दिया। प्रेमानंद महाराज ने भक्त के इस भाव को 'कुल का भ्रम' बताया।
सच्ची पहचान हरि से
महाराज जी ने कहा कि जब कोई व्यक्ति स्वयं को पूर्ण रूप से भगवान (ठाकुर जी) को समर्पित कर देता है, तो उसकी पहचान किसी सांसारिक कुल, गोत्र या जाति से नहीं, बल्कि प्रभु से होती है। उन्होंने भक्त को सख्त हिदायत दी कि आज के बाद यह शब्द कभी मत बोलना क्योंकि हमारे यहां इस शब्द की कोई मान्यता नहीं है।
भक्ति को बताया सर्वोपरि
महाराज जी के अनुसार, भक्ति को कभी भी जाति या जन्म की सीमाओं में नहीं बाँधा जा सकता। भक्ति का मार्ग केवल समर्पण, आचरण और भाव को महत्व देता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि चाहे कोई किसी भी कुल में जन्मा हो, यदि वह सच्चे भाव से भजन करता है और उसका आचरण शुद्ध है, तो वह इतना महान है कि संत भी उसका चरणामृत अपने माथे से लगाएंगे।
सभी जातियों और धर्मों के लोगों सुनते है सत्संग
प्रेमानंद जी महाराज अक्सर इस बात पर जोर देते हैं कि भगवान की भक्ति में कोई छोटा या बड़ा नहीं होता। वे सभी जातियों और धर्मों के लोगों को समान रूप से अपना सत्संग सुनाते हैं।