कठोर तपस्या,अटूट भक्ति... जानें माता पार्वती ने भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए कितने लिए थे जन्म

Update: 2026-02-08 02:30 GMT

नई दिल्ली। पौराणिक कथाओं के अनुसार माता पार्वती ने भगवान शिव को पति के रूप में प्राप्त करने के लिए कुल 108 बार जन्म लिए थे। अंततः अपने 108वें जन्म में, हिमालय की पुत्री पार्वती के रूप में, उन्होंने अपनी कठोर तपस्या और अटूट भक्ति से महादेव का हृदय जीता और उनकी अर्धांगिनी बनीं।

पुनर्जन्म का चक्र

सती के रूप में देह त्यागने के बाद, माता पार्वती ने शिव से पुनर्मिलन के लिए निरंतर प्रयास किए। हिंदू मान्यताओं के अनुसार, उन्हें 107 बार जन्म लेकर विभिन्न बाधाओं और परीक्षाओं का सामना करना पड़ा।

कठोर तपस्या

अपने अंतिम (108वें) जन्म में, पार्वती जी ने जंगल में रहकर कई वर्षों तक अन्न-जल त्यागकर कठोर तप किया। उनकी इस निष्काम भक्ति को देखकर ही शिव जी ने उन्हें स्वीकार किया।

पर्वों का महत्व

माता पार्वती के इसी समर्पण और 108 जन्मों के संघर्ष की स्मृति में तीज (जैसे हरियाली तीज) का त्यौहार मनाया जाता है। महिलाएं इस दिन व्रत रखकर पार्वती जी के धैर्य और प्रेम का उत्सव मनाती हैं।

आध्यात्मिक प्रतीक

यह कथा दर्शाती है कि सच्ची भक्ति और अटूट विश्वास से किसी भी लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है। 108 की संख्या पूर्णता और ब्रह्मांडीय ऊर्जा का प्रतीक मानी जाती है।

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