गांव के लिए 'तवायफ' नाम बना आफत! लड़कियो से शादी करने को जल्दी कोई तैयार नहीं होता, होना पड़ता है अपमानित

Update: 2026-02-08 06:30 GMT

बलिया। उत्तर प्रदेश के बलिया जिले का "रूपवार तवायफ" गांव इन दिनों अपने नाम के कारण भारी सामाजिक तिरस्कार का सामना कर रहा है। ग्रामीणों के लिए यह नाम एक 'अभिशाप' बन गया है, जिससे उनकी रोजमर्रा की जिंदगी और भविष्य पर बुरा असर पड़ रहा है।

इस नाम की वजह से ग्रामीणों को मुख्य रूप से निम्नलिखित समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।

शादी-ब्याह में बाधा: गांव की बेटियों के लिए रिश्ते आना लगभग बंद हो गए हैं। जैसे ही दूल्हे पक्ष को गांव के नाम में "तवायफ" शब्द का पता चलता है, वे रिश्ता तोड़ देते हैं।

सामाजिक उपहास और शर्मिंदगी: गांव के युवाओं और छात्रों को बाहर जाने पर अपमानित होना पड़ता है। स्कूल-कॉलेज में सहेलियाँ और अन्य लोग उनका मज़ाक उड़ाते हैं, जिससे उन्हें अपनी पहचान बताने में भी शर्म महसूस होती है।

मानसिक और मनोवैज्ञानिक प्रभाव: ग्रामीण खुद को 'अछूत' या तिरस्कृत महसूस करते हैं। सरकारी दस्तावेजों (आधार कार्ड, वोटर आईडी) में यह नाम दर्ज होने के कारण अधिकारी भी उन्हें अजीब नजरों से देखते हैं।

इतिहास का बोझ: बुजुर्गों के अनुसार, यह नाम ब्रिटिश काल या पुराने समय की किसी परंपरा की देन है, जिसका वर्तमान पीढ़ी से कोई लेना-देना नहीं है, फिर भी वे इसका दंश झेल रहे हैं।

ग्रामीण अब एकजुट होकर इस कलंक को मिटाने के लिए गांव का नाम बदलकर "देवपुर" या कोई अन्य सम्मानजनक नाम रखने की मांग प्रशासन और सरकार से कर रहे हैं।

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