अभिनेता के बाद अब नेता भी राजपाल यादव की मदद के लिए आए सामने, तेजप्रताप यादव ने इतनी रकम देने का किया ऐलान

Update: 2026-02-10 11:53 GMT

नई दिल्ली। एक्टर राजपाल यादव ने कुछ दिन पहले ही कोर्ट में सरेंडर कर दिया था। उनपर बकाया राशि न चुका पाने को लेकर मुकदमा चल रहा था, जिसमें राजपाल यादव को सजा भी सुनाई गई थी। बकाया राशि न चुका पाने को लेकर कोर्ट ने राजपाल यादव को सरेंडर करने के लिए कहा था। अब राजपाल की मदद करने के लिए अभिनेता से राजनेता तक सामने आए हैं। जहां पहले सोनू सूद ने राजपाल की मदद की बात कही थी तो वहीं तेजप्रताप यादव ने भी बड़ा ऐलान कर दिया है।

9 करोड़ रुपये का बकाया है

बता दें कि राजपाल यादव पर 9 करोड़ रुपये का बकाया है, जो उन्होंने एक फिल्म के लिए उधार लिए थे। दरअसल, सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर तेज प्रताप यादव ने एक पोस्ट में राजपाल यादव की मदद की बात कही। तेज प्रताप यादव ने एक्स पर अपनी पोस्ट में लिखा कि मुझे अभी मेरे बड़े भाई राव इंदरजीत यादव जी की पोस्ट के माध्यम से माननीय राजपाल यादव जी के परिवार की पीड़ा के विषय में जानकारी प्राप्त हुई। इस अत्यंत कठिन समय में मैं और मेरा पूरा JJD (जनशक्ति जनता दल) परिवार, उनके शोकाकुल परिवार के साथ पूरी संवेदना और मजबूती से खड़ा है। मानवीय करुणा एवं सहयोग की भावना से, मैं JJD परिवार की ओर से ₹11,00,000 (ग्यारह लाख रुपये) की आर्थिक सहायता उनके परिवार को प्रदान कर रहा हूं।

धारा 138 के तहत दोषी ठहराया

दरअसल, राजपाल यादव की कानूनी परेशानियों की शुरुआत साल 2010 में हुई थी, जब उन्होंने अपनी डायरेक्टोरियल डेब्यू फिल्म 'अता पता लापता' (2012) के लिए दिल्ली स्थित मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड से ₹5 करोड़ का लोन लिया था। फिल्म बॉक्स ऑफिस पर असफल रही, जिसके चलते भुगतान नहीं हो सका और मामला कोर्ट तक पहुंच गया। अप्रैल 2018 में मजिस्ट्रेट कोर्ट ने राजपाल यादव और उनकी पत्नी राधा यादव को नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट की धारा 138 के तहत दोषी ठहराया।

छह महीने की जेल की सजा सुनाई गई

शिकायतकर्ता को दिए गए सात चेक बाउंस होने के बाद एक्टर को छह महीने की साधारण जेल की सजा सुनाई गई, जिसे 2019 की शुरुआत में सेशन कोर्ट ने भी बरकरार रखा। इसके बाद दिल्ली हाई कोर्ट में रिवीजन पिटीशन दायर की गई, लेकिन समय के साथ उनकी मुश्किलें बढ़ती चली गईं। जून 2024 में कोर्ट ने सजा को अस्थायी रूप से सस्पेंड करते हुए बकाया रकम चुकाने के लिए “ईमानदारी और ठोस कदम” उठाने का निर्देश दिया, जो बढ़कर लगभग ₹9 करोड़ तक पहुंच चुकी थी। हालांकि लगातार डेडलाइन मिस होने और वादे पूरे न होने के चलते कोर्ट का रुख सख्त होता गया।

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