Agni Panchak 2026: महाभयंकर और अशुभ क्यों होता है अग्नि पंचक? इसी में लगेगा साल का पहला सूर्य ग्रहण, जानें नियम

Update: 2026-02-17 08:54 GMT

नई दिल्ली। हिंदू धर्म और ज्योतिष शास्त्र में 'पंचक' को बहुत महत्वपूर्ण माना गया है। जब चंद्रमा कुंभ और मीन राशि में गोचर करते हैं, तो उस समय को पंचक कहा जाता है। 2026 में अग्नि पंचक इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि इसी दौरान साल का पहला सूर्य ग्रहण भी लगने जा रहा है, जो इसकी संवेदनशीलता को बढ़ा देता है। अग्नि पंचक में संयम और सावधानी ही सबसे बड़ा बचाव है। इस दौरान किसी भी प्रकार के बड़े निवेश या नए निर्माण से बचना बेहतर रहता है।

अग्नि पंचक क्या है?

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, पंचक जिस वार (दिन) से शुरू होता है, उसके आधार पर उसका नाम और प्रभाव बदल जाता है। जब पंचक मंगलवार से शुरू होता है, तो उसे अग्नि पंचक कहा जाता है। मंगल ग्रह 'अग्नि' तत्व का स्वामी है, इसलिए इस दौरान आग लगने, दुर्घटना और वाद-विवाद की आशंका अधिक रहती है।

इसे अशुभ और खतरनाक क्यों माना जाता है?

अग्नि पंचक को अन्य पंचकों की तुलना में अधिक घातक माना जाता है क्योंकि इसका सीधा संबंध विनाश और दुर्घटनाओं से होता है।

अग्नि का भय: इस दौरान आगजनी, शॉर्ट सर्किट या मशीनरी से जुड़ी दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है।

कोर्ट-कचहरी और विवाद: मंगलवार का स्वभाव उग्र होता है। इस समय में किए गए झगड़े या मुकदमे लंबे खिंच सकते हैं।

अशुभ फल की पुनरावृत्ति: ऐसी मान्यता है कि पंचक में यदि कोई अशुभ घटना घटती है, तो उसकी पांच बार पुनरावृत्ति होने की संभावना रहती है।

निर्माण कार्य में बाधा: इस दौरान घर की छत डलवाना या दक्षिण दिशा की यात्रा करना अत्यंत वर्जित माना गया है।

सूर्य ग्रहण के साथ अग्नि पंचक का संयोग (2026)

17 फरवरी 2026 को लगने वाला सूर्य ग्रहण और अग्नि पंचक का एक साथ होना ज्योतिषियों के लिए चिंता का विषय है। 

नकारात्मक ऊर्जा में वृद्धि: ग्रहण और पंचक दोनों ही सूतक और बाधाओं के कारक हैं। इनका मेल मानसिक तनाव और वैश्विक स्तर पर उथल-पुथल ला सकता है।

प्राकृतिक आपदाएं: अग्नि तत्व प्रधान होने के कारण ज्वालामुखी विस्फोट, भीषण गर्मी या युद्ध जैसी स्थितियां बनने की आशंका रहती है।

स्वास्थ्य पर प्रभाव: मंगल और राहु-केतु (ग्रहण के कारक) का प्रभाव रक्त संबंधी विकारों और क्रोध को बढ़ा सकता है।

पंचक में क्या न करें? (नियम)

शास्त्रों के अनुसार पंचक के दौरान ये 5 काम बिल्कुल नहीं करने चाहिए।

- घर की ढलाई या लेंटर डालना।

- ईंधन, घास या लकड़ी का संचय करना (आग लगने का डर)।

- नया बेड या चारपाई बुनना।

-  इसे यम की दिशा माना जाता है, जो पंचक में कष्टकारी हो सकती है।

- यदि पंचक में किसी की मृत्यु हो जाए, तो विशेष शांति पूजन के बिना दाह संस्कार नहीं करना चाहिए।

शांति के उपाय

यदि इस दौरान कोई आवश्यक कार्य करना ही पड़े, तो ज्योतिष शास्त्र कुछ उपाय सुझाता है।

- हनुमान जी की उपासना करें और सुंदरकांड का पाठ करें।

- मंगलवार को लाल वस्तुओं का दान करें।

- ग्रहण के दौरान मंत्र जाप (जैसे 'ॐ नमः शिवाय') करें ताकि नकारात्मक प्रभाव कम हो सके।


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