'अजमल कसाब ने भी अवमानना नहीं की, आपकी क्लाइंट ने की'...सुप्रीम कोर्ट मेनका गांधी पर भड़का!

पीठ ने स्पष्ट किया कि संस्थागत परिसरों में आवारा कुत्तों की मौजूदगी और नगर निगम अधिकारियों की जिम्मेदारी जैसे पहलुओं पर गंभीरता से विचार करना जरूरी है।

Update: 2026-01-20 12:20 GMT

नई दिल्ली।वारा कुत्तों के प्रबंधन के मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई चल रही थी। लेकिन अचानक से माहौल गर्म हो गया, जब बीजेपी नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी की टिप्पणियों पर कोर्ट ने सख्त नाराजगी जाहिर की। हालांकि, अदालत ने उनके खिलाफ कोर्ट की अवमानना की कार्यवाही शुरू करने से परहेज किया है। बता दें कि इस मामले की सुनवाई के दौरान मेनिका गांधी के वकील की दलील पर जस्टिस विक्रम नाथ ने बेहद कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि अजमल कसाब ने कोर्ट की अवमानना नहीं की थी, लेकिन आपकी क्लाइंट ने ऐसा किया है। पीठ ने स्पष्ट किया कि संस्थागत परिसरों में आवारा कुत्तों की मौजूदगी और नगर निगम अधिकारियों की जिम्मेदारी जैसे पहलुओं पर गंभीरता से विचार करना जरूरी है।

सुनवाई के दौरान रखी गईं दलीलें

सुनवाई के दौरान वकीलों ने कहा कि नगर निगमों की असफलता की वजह से कचरा नहीं उठता, जिससे कुत्ते इकट्ठा होते हैं। शहरीकरण के साथ कचरा बढ़ा है, लेकिन उसके प्रबंधन में कमी है। कोर्ट ने कहा कि आवारा कुत्तों की समस्या केवल भावनात्मक बहस नहीं, बल्कि प्रशासनिक जिम्मेदारी का भी सवाल है। नसबंदी और कचरा प्रबंधन जैसी मूल जिम्मेदारियां अधिकारियों की हैं।

न्यायमूर्ति संदीप मेहता ने पूछे तीखे सवाल

मेनका गांधी की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील राजू रामचंद्रन से न्यायमूर्ति संदीप मेहता ने तीखे सवाल पूछे। कोर्ट ने पूछा कि मंत्री और पशु अधिकार कार्यकर्ता रहने के दौरान बजटीय आवंटन और ठोस पहल का जिक्र आवेदन में क्यों नहीं लिखा है। पीठ ने यह भी जानने की इच्छा जाहिर की कि सार्वजनिक मंचों पर की गई टिप्पणियों के प्रभाव का आकलन क्यों नहीं किया गया।

पीठ ने वरिष्ठ वकील राजू रामचंद्रन से कहा

पीठ ने राजू रामचंद्रन से तीखे लहजे में कहा कि आप कोर्ट से संयम बरतने की बात कर रहे हैं, लेकिन क्या आपने अपनी क्लाइंट की टिप्पणियां देखी हैं? उन्होंने बिना सोचे-समझे सबके खिलाफ बयान दिए हैं। क्या आपने उनका बॉडी लैंग्वेज पर ध्यान दिया है। इस पर रामचंद्रन ने जवाब दिया कि उन्होंने आतंकवादी अजमल कसाब की ओर से भी पैरवी की है और बजट आवंटन नीति का विषय है।

गौरतलब है कि अदालत ने 13 जनवरी को संकेत दिया था कि डॉग बाइट के मामलों में राज्यों पर भारी मुआवजा लगाया जा सकता है और डॉग फीडर्स की जिम्मेदारी भी तय की जाएगी।

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