हरियाणा में राज्यसभा की दो सीटों के चुनाव के लिए कांग्रेस और भाजपा ने बनाई यह रणनीति, जानें क्या
फिलहाल राज्यसभा चुनाव को लेकर प्रदेश का राजनीतिक माहौल लगातार गर्माता जा रहा है।
नई दिल्ली। हरियाणा में राज्यसभा की दो सीटों के चुनाव के लिए कांग्रेस और भाजपा ने रणनीति बनाई है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के करीबी भाजपा ने गुजरात के उपमुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री हर्ष सांघवी को केंद्रीय पर्यवेक्षक नियुक्त किया है। कांग्रेस ने भी इस चुनाव को जीतने के लिए गोपनीय तैयारी की है। जिसकी जानकारी बाहर नहीं आई है। इस चुनाव को दोनों पार्टी हल्के में नहीं ले रही है।
सांगवी को गृहमंत्री का करीबी बताते हैं
सूरत के मंजूरा विधानसभा क्षेत्र से विधायक सांघवी को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का करीबी माना जाता है। 41 वर्षीय सांघवी को पार्टी ने राज्यसभा चुनाव की रणनीति को मजबूत करने और दोनों सीटों पर जीत सुनिश्चित कराने की जिम्मेदारी सौंपी है। पार्टी के रणनीतिकारों का मानना है कि सही राजनीतिक प्रबंधन और विधायकों के समन्वय के जरिए यह लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। सांघवी के हरियाणा आने को राज्यसभा चुनाव में बड़े राजनीतिक घटनाक्रम की संभावना से जोड़कर देखा जा रहा है।
राज्यसभा की दो सीटों के लिए तीन उम्मीदवार मैदान में हैं
भाजपा से संजय भाटिया, कांग्रेस से कर्मवीर बौद्ध और तीसरे उम्मीदवार के रूप में भाजपा समर्थित निर्दलीय सतीश नांदल चुनाव लड़ रहे हैं। राजनीतिक समीकरणों के अनुसार भाटिया की जीत लगभग तय मानी जा रही है। ऐसे में भाजपा का पूरा जोर दूसरी सीट पर नांदल को जिताने पर है। नांदल की जीत तभी संभव है, जब उन्हें कांग्रेस के कुछ विधायकों का भी समर्थन मिले।
सांघवी पार्टी के लिए अनुकूल माहौल तैयार करेंगे
भाजपा नेतृत्व को भरोसा है कि सांघवी अपनी रणनीतिक क्षमता से पार्टी के लिए अनुकूल माहौल तैयार करेंगे। सांघवी की भूमिका विधायकों से संवाद, रणनीतिक समन्वय और मतदान तक राजनीतिक समीकरण साधने में अहम मानी जा रही है।
भाजपा में सांघवी की पहचान एक कुशल प्रबंधनकर्ता और रणनीतिकार के रूप में है। उन्होंने पार्टी के युवा मोर्चा से लेकर सरकार में महत्वपूर्ण पदों तक का सफर तय किया है। यही कारण है कि हरियाणा जैसे संवेदनशील राजनीतिक समीकरण वाले राज्य में राज्यसभा चुनाव की जिम्मेदारी उन्हें सौंपी गई है।