पिता-पुत्र होने के बावजूद भी आखिर क्यों शनि-सूर्य में रहती है घोर दुश्मनी, जानें वजह
नई दिल्ली। सूर्य देव और शनि देव के बीच पिता-पुत्र का संबंध होने के बावजूद कट्टर दुश्मनी का मुख्य कारण शनि देव का जन्म और उनके रंग को लेकर हुआ विवाद है। सूर्य जहां प्रकार, अहं, आत्मबल और नेतृत्व का प्रतीक है, वहीं शनि अधंकार, संघर्ष, विलंब और तप का।
माता छाया का तप और शनि का रंग
सूर्य देव की पत्नी संज्ञा उनका तेज सहन नहीं कर पा रही थीं, इसलिए वे अपनी छाया (प्रतिरूप) को छोड़कर तपस्या करने चली गईं। छाया जब गर्भवती थीं, तब उन्होंने भगवान शिव की कठोर तपस्या की और तेज धूप में भूखी-प्यासी रहीं, जिससे गर्भ में पल रहे शनि देव का रंग काला हो गया।
सूर्य देव का अपमान और संदेह
जब शनि देव का जन्म हुआ, तो उनके काले रंग को देखकर सूर्य देव को संदेह हुआ कि यह उनकी संतान नहीं हो सकती। उन्होंने अपनी पत्नी छाया के चरित्र पर सवाल उठाए और उन्हें अपमानित किया। अपनी माता का अनादर देखकर शनि देव क्रोधित हो गए। माना जाता है कि जब शनि देव की पहली दृष्टि अपने पिता सूर्य पर पड़ी, तो सूर्य देव काले पड़ गए और उन्हें कुष्ठ रोग हो गया। भगवान शिव के हस्तक्षेप के बाद सूर्य देव को अपनी गलती का एहसास हुआ और उन्होंने माफी मांगी, लेकिन तब तक दोनों के बीच कटुता आ चुकी थी।
भगवान शिव का वरदान
शनि देव ने भगवान शिव की कठोर तपस्या की। शिव जी ने उन्हें वरदान दिया कि वे अपने पिता से भी अधिक शक्तिशाली होंगे और संसार के सर्वोच्च न्यायाधीश व दंडाधिकारी कहलाएंगे।
ज्योतिषीय दृष्टिकोण
ज्योतिष शास्त्र में सूर्य को 'राजा' (अहंकार और अधिकार) और शनि को 'सेवक' (अनुशासन और कर्म) माना जाता है। प्रकाश (सूर्य) और अंधकार (शनि) के स्वभाव में विरोधाभास होने के कारण भी इन्हें एक-दूसरे का नैसर्गिक शत्रु माना गया है।