मरने के बाद भी इंसान डिजिटल रूप में रहेगा जीवित, जानें क्या है ये हैरान कर देने वाली तकनीक

Update: 2026-02-04 09:30 GMT

नई दिल्ली। क्या कोई मानेगा कि मरने के बाद भी कोई व्यक्ति डिजिटल रूप में जीवित रह सकता है। जी हां मृत्यु के बाद व्यक्ति को डिजिटल रूप में जीवित रखने वाली इस तकनीक को 'डिजिटल इम्मोर्टालिटी' या 'डेथ टेक' कहा जाता है। यह तकनीक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग कर मृत व्यक्ति का एक आभासी अवतार या 'डिजिटल ट्विन' तैयार करती है जो जीवितों के साथ बातचीत कर सकता है।

यह नई एआई तकनीक क्या है?

यह तकनीक मुख्य रूप से मृत व्यक्ति द्वारा छोड़े गए 'डिजिटल फुटप्रिंट्स' (सोशल मीडिया पोस्ट, वॉइस रिकॉर्डिंग, ईमेल और वीडियो) पर आधारित है।

डिजिटल अवतार और चैटबॉट्स: AI एल्गोरिदम इन आंकड़ों का विश्लेषण कर व्यक्ति की बोलने की शैली, व्यवहार और व्यक्तित्व की नकल करते हैं।

डेथबॉट्स (Deathbots): कुछ कंपनियां जैसे StoryFile और HereAfter AI ऐसे वीडियो अवतार और चैटबॉट्स बनाती हैं जो मृत व्यक्ति की तरह सवालों के जवाब दे सकते हैं।

वॉइस क्लोनिंग: व्यक्ति की आवाज को हुबहू कॉपी किया जा सकता है ताकि वह मरने के बाद भी अपने प्रियजनों से फोन या स्मार्ट डिवाइस के जरिए बात कर सके।

इसके बड़े खतरे और चुनौतियां

बता दें कि जितनी यह तकनीक सुनने में सुकून देने वाली लगती है, इसके खतरे उतने ही गंभीर हैं।

1.मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा प्रभाव

विशेषज्ञों के अनुसार, मृत व्यक्ति के डिजिटल अवतार से निरंतर संपर्क दुख को कम करने के बजाय उसे और बढ़ा सकता है। इससे व्यक्ति असलियत को स्वीकार नहीं कर पाता और एक 'डिजिटल भूत' के साये में जीने लगता है, जिसे 'डिजिटल हंटिंग' कहा गया है।

2. डेटा का दुरुपयोग और निजता

मरने के बाद व्यक्ति अपनी गोपनीयता (Privacy) की रक्षा नहीं कर सकता। हैकर्स या कंपनियां इन अवतारों का उपयोग स्कैम करने, संवेदनशील जानकारी उजागर करने या मृतक की छवि खराब करने के लिए कर सकती हैं।

3. सहमति का अभाव

कई मामलों में व्यक्ति की मृत्यु के बाद उसके परिवार वाले उसकी मर्जी के बिना उसका डिजिटल अवतार बना लेते हैं, जो व्यक्ति के निजी अधिकारों का उल्लंघन हो सकता है।

4. गलत बयानी

समय के साथ AI मॉडल 'भ्रम' (Hallucinate) पैदा कर सकते हैं और ऐसी बातें कह सकते हैं जो उस व्यक्ति ने कभी नहीं सोची या कही थीं, जिससे उसकी विरासत (Legacy) को नुकसान पहुंच सकता है।

5. व्यावसायिक शोषण

कंपनियां इन अवतारों का उपयोग विज्ञापनों या अन्य व्यावसायिक उद्देश्यों के लिए कर सकती हैं, जिससे मृत व्यक्ति का व्यक्तित्व एक उत्पाद बन कर रह जाता है।

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