नेपाल में सट्टा पलटते ही पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली गिरफ्तार, जानें अब नई सरकार की अगली कार्रवाई क्या होगी
सरकार का कहना है कि दोषियों को किसी भी हालत में बख्शा नहीं जाएगा और कानून अपना काम करेगा।
नई दिल्ली। जैन जी विरोध प्रदर्शन में कथित भूमिका के आरोप में नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को गिरफ्तार कर लिया गया है। पिछले साल हुए हिंसक प्रदर्शनों में 70 से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी। जांच आयोग की रिपोर्ट के बाद नई सरकार ने कार्रवाई शुरू की है। उनके साथ पूर्व गृहमंत्री रमेश लेखक भी हिरासत में लिए गए हैं। नेपाल में सत्ता परिवर्तन के बाद ही यह कार्रवाई हुई है।
सत्ता परिवर्तन के बाद बड़ी कार्रवाई
नेपाल की राजनीति में सत्ता परिवर्तन के बाद यह बड़ी कार्रवाई हुई है। यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है, जब नए प्रधानमंत्री बलेंद्र शाह ने हाल ही में पद की शपथ ली है। इस गिरफ्तारी ने देश की राजनीति में हलचल तेज कर दी है। काठमांडू वैली पुलिस के अनुसार, दोनों को सुबह गिरफ्तार किया गया और अब आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू की जाएगी। ओली ने इस गिरफ्तारी को राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताया है और कानूनी लड़ाई लड़ने की बात कही है।
यह कार्रवाई किसी बदले की भावना से नहीं
पूर्व प्रधानमंत्री की गिरफ्तारी के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है। मौजूदा सरकार पर भी आरोप लग रहे हैं। सरकार ने साफ किया है कि यह कार्रवाई किसी बदले की भावना से नहीं, बल्कि कानून के तहत की जा रही है। हाल ही में बनी उच्च स्तरीय जांच आयोग ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि उस समय उच्च पदों पर बैठे लोगों ने हालात को संभालने में लापरवाही बरती। जांच आयोग ने केवल ओली और रमेश लेखक ही नहीं, बल्कि कई अन्य वरिष्ठ अधिकारियों पर भी कार्रवाई की सिफारिश की है। इनमें नेपाल पुलिस के तत्कालीन महानिरीक्षक चंद्र कुबेर खापुंग का नाम भी शामिल है। ऐसे में आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं। यह मामला अब नेपाल की राजनीति और न्याय व्यवस्था के लिए बड़ी परीक्षा बन गया है।
देश की राजनीति को पूरी तरह बदल दिया
पिछले साल सितंबर में नेपाल में बड़े स्तर पर भ्रष्टाचार विरोधी प्रदर्शन हुए थे, जिन्हें जैन-जी विरोध प्रदर्शन कहा गया। हिंसा के बाद ओली सरकार पर गंभीर सवाल उठे और आखिरकार उनकी सरकार गिर गई। इन घटनाओं ने देश की राजनीति को पूरी तरह बदल दिया। आयोग ने ओली और रमेश लेखक समेत कई अधिकारियों को जिम्मेदार ठहराया और उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की सिफारिश की। रिपोर्ट में अधिकतम 10 साल की सजा की भी सिफारिश की गई थी, जिसके बाद नई सरकार ने इसे लागू करने का फैसला लिया। नए गृहमंत्री सुदन गुरूंग ने कहा कि वादा तो वादा होता है और कानून से ऊपर कोई नहीं है। उन्होंने साफ किया कि यह कदम न्याय की दिशा में पहला कदम है और देश को नई दिशा देने की कोशिश है। सरकार का कहना है कि दोषियों को किसी भी हालत में बख्शा नहीं जाएगा और कानून अपना काम करेगा।