हनुमान जी ने प्रभु श्रीराम के दिव्य स्वरूप का किया था वर्णन! जानें कैसे थे रघुवंशी
नई दिल्ली। वाल्मीकि रामायण के सुंदरकांड (सर्ग 35) के अनुसार, जब हनुमान जी लंका में माता सीता से मिले, तो उन्होंने प्रभु श्री राम के दिव्य और अलौकिक स्वरूप का विस्तार से वर्णन किया। हनुमान जी ने श्री राम को 'सामुद्रिक शास्त्र' के सभी शुभ लक्षणों से युक्त एक महापुरुष के रूप में बताया।
शारीरिक संरचना
प्रभु श्री राम के कंधे चौड़े (विपुलांसः), भुजाएं घुटनों तक लंबी (आजानुबाहु) और गर्दन शंख के समान सुडौल है। उनकी छाती विशाल और मांसल है, और उनकी हंसली की हड्डियाँ मांस से ढकी हुई हैं।
मुखमंडल
उनका मुख चंद्रमा के समान सौम्य और कांतिपूर्ण है। उनके होंठ बिम्बा फल के समान लाल हैं, गाल भरे हुए (पीन कपोल) और नाक ऊंची व सुडौल है।
नेत्र
उनकी आंखें बड़ी-बड़ी और खिले हुए कमल के पत्तों के समान सुंदर हैं (कमलपत्राक्ष)। आंखों के कोने लालिमा लिए हुए हैं।
वर्ण (रंग)
श्री राम का रंग नीले कमल या साफ़ नीलम के समान श्याम है, जो अत्यंत चमकदार और स्निग्ध है।
चाल और वाणी
उनकी चाल सिंह, हाथी या बैल के समान गरिमापूर्ण और ओजस्वी है। उनकी वाणी दुन्दुभि (नगाड़े) की गंभीर ध्वनि के समान मधुर और प्रभावशाली है।
विशेष लक्षण
उनके शरीर के अंगों में 'तीन' की संख्या का विशेष महत्व बताया गया है- जैसे गर्दन और पेट पर तीन रेखाएं (वलियां) हैं। उनकी लंबाई 96 अंगुल (लगभग 6 फीट) बताई गई है और उनके शरीर के सभी अंग पूर्णतः संतुलित और सुडौल हैं। हनुमान जी ने माता सीता को यह भी बताया कि श्री राम न केवल बाहरी रूप से सुंदर हैं, बल्कि वे अत्यंत धैर्यवान, बुद्धिमान (बृहस्पति के समान) और सभी प्राणियों का कल्याण करने वाले हैं।