नवरात्रि में ऐसे करें कलश की स्थापना, जानें पूजा के लिए सभी आवश्यक चीजें

Update: 2026-03-17 02:30 GMT

नई दिल्ली। पंचांग के अनुसार, साल 2026 में चैत्र नवरात्रि 19 मार्च से शुरू होकर 27 मार्च तक मनाई जाएगी। नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना या घटस्थापना का विशेष महत्व होता है। नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना (घटस्थापना) का विशेष महत्व है, क्योंकि कलश को सुख, समृद्धि और देवी शक्ति का प्रतीक माना जाता है। इसकी तैयारी के लिए आपको कुछ विशेष सामग्रियों की आवश्यकता होगी।

कलश स्थापना के लिए आवश्यक सामग्री

कलश तैयार करने के लिए इन चीजों को पहले से एकत्रित कर लें।

कलश: मिट्टी, तांबे या पीतल का कलश/लोटा।

पवित्र जल: गंगाजल और शुद्ध जल।

पल्लव: आम या अशोक के 5, 7 या 11 पत्ते।

नारियल: जटा वाला पानी का नारियल, जिसे लाल कपड़े या चुनरी में लपेटकर रखा जाता है।

कलश के अंदर डालने हेतु: सिक्का, सुपारी, अक्षत (बिना टूटे चावल), लौंग, इलायची, हल्दी की गांठ और इत्र।

सजावट: मौली (लाल धागा), रोली (सिंदूर) और चंदन तिलक लगाने के लिए।

जौ बोने (ज्वारे) की तैयारी

मिट्टी का पात्र: मिट्टी का एक चौड़ा और खुला बर्तन।

शुद्ध मिट्टी: खेत या किसी पवित्र स्थान की साफ मिट्टी।

जौ (ज्वारे): बोने के लिए साफ जौ के बीज।

पूजा चौकी और अन्य सामान

- लकड़ी की चौकी और उस पर बिछाने के लिए लाल या पीला साफ कपड़ा।

- अखंड ज्योति या साधारण दीपक के लिए घी/तेल, रुई की बाती, माचिस, धूपबत्ती और कपूर।

- माता की मूर्ति या तस्वीर, लाल फूल, फूलों की माला, फल, मिठाई और मेवे का भोग।

कलश स्थापना की संक्षिप्त विधि

- पूजा स्थल को साफ कर वहां लकड़ी की चौकी रखें और उस पर लाल कपड़ा बिछाएं।

- मिट्टी के पात्र में मिट्टी फैलाकर उसमें जौ बोएं।

- कलश पर स्वास्तिक बनाएं और उसके गले में मौली बांधें।

- कलश में जल भरकर उसमें सुपारी, सिक्का और अन्य सामग्री डालें।

- कलश के मुख पर आम के पत्ते रखें और उसके ऊपर लाल कपड़े में लिपटा नारियल स्थापित करें।

- अंत में, हाथ में अक्षत लेकर माता दुर्गा का आह्वान करें। 

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