किसी की देशभक्ति को किसी नारे से जोड़ना सही नहीं है...जानें ओवैसी ने यह बात क्यों कही ?
नई दिल्ली। एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने एक साथ संसद, हिजाब, वंदे मातरम समेत कई मुद्दों पर खुलकर अपनी राय रखी। ओवैसी ने कहा कि यह वफादारी की परीक्षा नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत का संविधान ‘वी द पीपल’ यानी ‘हम भारत के लोग’ से शुरू होता है, न कि ‘भारत माता की जय’ से। ओवैसी ने कहा कि संविधान का अनुच्छेद 25 हर नागरिक को धर्म की स्वतंत्रता का मूल अधिकार देता है। ऐसे में किसी की देशभक्ति को किसी नारे से जोड़ना सही नहीं है।
फादारी का कोई प्रमाणपत्र देने की जरूरत नहीं
उन्होंने सवाल उठाया कि क्या राष्ट्रीय गान को खत्म करने की कोशिश की जा रही है? ओवैसी ने कहा कि उन्हें अपनी वफादारी का कोई प्रमाणपत्र देने की जरूरत नहीं है। उनका कहना है कि हर नागरिक को अपने धर्म और विचारों के अनुसार जीने की आजादी है और यही संविधान की भावना है। उन्होंने तेलंगाना में हुए चुनाव को लेकर भाजपा पर जमकर निशाना साधा। ओवैसी ने कहा कि तेलंगाना नगरपालिका चुनाव के दौरान भाजपा नेता हर पांच मिनट में उनका नाम तीन बार लेते थे, जिससे ऐसा लगता है कि वे उन्हें पसंद करते हैं। इसके साथ ही आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत की तरफ से वीर सावरकर को भारत रत्न देने की मांग पर भी उन्होंने अपनी प्रतिक्रिया दी।
सुप्रीम कोर्ट का फैसला गलत था
ओवैसी ने कहा कि अगर वे चाहें तो नाथूराम गोडसे को भी भारत रत्न दे सकते हैं। ओवैसी ने कहा कि तेलंगाना में उनकी पार्टी संरचनात्मक विपक्ष की भूमिका निभा रहा है, जबकि सरकार केवल तब लाभान्वित होती है जब संसद काम नहीं करती। उन्होंने यह भी बताया कि विपक्ष ने जो दस्तावेज पेश किया, वह सार्वजनिक दस्तावेज था और सरकार इसे खारिज नहीं कर रही। बाबरी मस्जिद के सुप्रीम कोर्ट फैसले पर भी ओवैसी ने अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि मैं अब भी मानता हूं कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला गलत था। असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा के एक वीडियो पर उन्होंने कहा कि यह वीडियो जातिगत भेदभाव और हिंसा भड़काने वाला था। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर यह वीडियो ओवैसी ने बनाया होता, तो क्या होता।