एलोरा, महाराष्ट्र-यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल एलोरा की गुफा संख्या 16 में स्थित कैलाश मंदिर केवल इंजीनियरिंग का नमूना नहीं, बल्कि गहरी आस्था की कहानी है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, इस भव्य मंदिर का निर्माण एक रानी की कठिन प्रतिज्ञा को पूरा करने के लिए किया गया था।
रानी की प्रतिज्ञा और कृष्ण प्रथम का संकल्प
स्थानीय लोककथाओं और कुछ ऐतिहासिक संदर्भों के अनुसार, राष्ट्रकूट राजा कृष्ण प्रथम गंभीर रूप से बीमार पड़ गए थे। उनकी पत्नी ने भगवान शिव से मन्नत मांगी कि यदि राजा स्वस्थ हो जाते हैं, तो वह एक भव्य मंदिर का निर्माण कराएंगी और मंदिर का शिखर देखने के बाद ही अपना उपवास तोड़ेंगी।
असंभव को संभव बनाती तकनीक
राजा स्वस्थ तो हो गए, लेकिन वास्तुकारों के सामने बड़ी चुनौती थी। पारंपरिक तरीके से मंदिर बनाने में वर्षों लगते, जिससे रानी का उपवास लंबा खिंच सकता था। तब 'कोकसा' नामक एक कुशल वास्तुकार ने उर्ध्वमुखी (ऊपर से नीचे की ओर) कटाई का सुझाव दिया।
चट्टान की कटाई
कलाकारों ने पहाड़ के ऊपर से खुदाई शुरू की।
रिकॉर्ड समय
मात्र एक सप्ताह के भीतर मंदिर का ऊपरी शिखर तैयार कर दिया गया, जिससे रानी अपना व्रत खोल सकीं।
विशालता
एक ही पत्थर को काटकर बनाया गया यह दुनिया का सबसे बड़ा एकल ढांचा (Monolith) है।
आज की प्रासंगिकता
यह मंदिर आज भी वैज्ञानिकों के लिए पहेली है क्योंकि इसे बनाने में करीब 4 लाख टन पत्थर काटकर निकाले गए थे, जिनका कोई अवशेष आज तक आसपास नहीं मिला। यह प्राचीन भारतीय इंजीनियरिंग और अटूट विश्वास का सजीव प्रमाण है।