शराब घोटाला मामला: ईडी और सीबीआई के अपने पैर नहीं हैं और दांत ड्रैकुला वाला है... बोले सौरभ भारद्वाज

सौरभ भारद्वाज ने कहा कि हिंदुस्तान में सबसे बड़ी समस्या भ्रष्टाचार है। आम धारणा यह है कि ज्यादातर नेता भ्रष्ट हैं।

Update: 2026-02-27 07:51 GMT

नई दिल्ली। आज का दिन अरविंद केजरीवाल के लिए बहुत बड़ा है। बता दें कि दिल्ली आबकारी नीति (शराब घोटाला) मामले में आज राऊज एवेन्यू कोर्ट द्वारा पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया, के. कविता और विजय नायर समेत सभी 23 आरोपियों को भ्रष्टाचार के मामले में डिस्चार्ज (बरी) कर दिया है। ऐसे में सौरभ भारद्वाज ने कई गंभीर सवाल उठाए है। उन्होंने कहा कि देश में यह संदेश गया ईमानदार रहना बेकार नहीं है। उन्होंने कहा कि आज कोर्ट के फैसले से यह साबित हो गया कि ईडी और सीबीआई के अपने पैर नहीं हैं, इसे केंन्द्र सरकार ने व्हील चेयर पर रखा है और उसे ड्रैकुला वाला दांत दे दिया है।

सौरभ भारद्वाज ने उठाए सवाल

सौरभ भारद्वाज ने कहा कि हिंदुस्तान में सबसे बड़ी समस्या भ्रष्टाचार है। आम धारणा यह है कि ज्यादातर नेता भ्रष्ट हैं। कई अफसरों पर भी भ्रष्टाचार के आरोप लगते रहते हैं, चाहे वे आईएएस हों या आईपीएस. खुलेआम पैसों के लेन-देन की बातें समाज में चर्चा का विषय रहती हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे माहौल में अगर कोई अफसर ईमानदारी से काम करता है, जैसे दुर्गा शक्ति नागपाल या अशोक खेमका जैसे अधिकारियों के साथ जो हुआ, वह सबके सामने है। ईमानदारी दिखाने पर उन्हें प्रताड़ित किया गया। उन्होंने हाई कोर्ट के जज मुरलीधर का भी उदाहरण देते हुए कहा कि एक फैसले के बाद रातोंरात उनका तबादला कर दिया गया।

देश में क्या संदेश जाता है। क्या ईमानदार रहना बेकार है- सौरभ भारद्वाज

सौरभ भारद्वाज ने कहा कि अरविंद केजरीवाल पहले आईआरएस अधिकारी थे, आईआईटी से पढ़े हुए हैं। उन्होंने नौकरी छोड़कर सार्वजनिक जीवन में कदम रखा। 10 साल तक मुख्यमंत्री रहे, लेकिन उन पर भी भ्रष्टाचार का ठप्पा लगा दिया गया। छह महीने जेल में रखा गया। उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी डायबिटीज की दवाइयों तक में दिक्कतें डाली गईं और उन्हें सार्वजनिक रूप से अपमानित किया गया।

उन्होंने कहा कि किसी भी व्यक्ति के परिवार, बच्चों और सामाजिक प्रतिष्ठा पर ऐसे आरोपों का असर पड़ता है। समाज में तंज कसे जाते हैं, सवाल उठते हैं। इससे देश में क्या संदेश जाता है। क्या ईमानदार रहना बेकार है. क्या सिस्टम यही बताना चाहता है कि अगर भ्रष्टाचार करो तो समझौते से मामला खत्म हो सकता है।

केंद्र सरकार पर आरोप लगाए

उन्होंने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया कि इस तरह की कार्रवाइयों से देश की सामाजिक संरचना को नुकसान पहुंच रहा है। उन्होंने कहा कि पहले शिकायत दर्ज कराई जाती है, फिर सीबीआई केस दर्ज करती है और उसके बाद यह कहकर कि भ्रष्टाचार हुआ होगा तो मनी लॉन्ड्रिंग भी हुई होगी, ईडी के तहत पीएमएलए का केस लगा दिया जाता है। सौरभ भारद्वाज ने कहा कि पीएमएलए के तहत जमानत पाना बेहद मुश्किल होता है और जांच के नाम पर वर्षों तक किसी को जेल में रखा जा सकता है. उन्होंने कहा कि अगर मूल “प्रेडिकेट ऑफेंस” यानी मूल भ्रष्टाचार का केस ही अदालत में गिर गया, तो फिर पीएमएलए का मामला कैसे टिकेगा। उन्होंने यह भी कहा कि सीबीआई और ईडी के कामकाज पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। उनका आरोप है कि राजनीतिक रूप से संवेदनशील मामलों में चुनिंदा तरीके से कार्रवाई की जाती है।

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