NAVRATRI 2026: एक साथ मनाई जाएगी अष्टमी-नवमी? जानें तिथि और कब करें कन्या पूजन

Update: 2026-03-25 06:54 GMT

नई दिल्ली। चैत्र नवरात्रि का पावन अवसर चल रहा है। चैत्र नवरात्रि का पर्व हिंदू धर्म में बेहद पवित्र और फलदायी माना जाता है। इन नौ दिनों में मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है। इनमें महाष्टमी का दिन विशेष महत्व रखता है, जो मां महागौरी को समर्पित होता है। ऐसे में साल 2026 में चैत्र नवरात्रि की अष्टमी और नवमी तिथियों को लेकर थोड़ा बदलाव है क्योंकि इस बार ये दोनों तिथियां एक ही दिन यानी 26 मार्च 2026 को पड़ रही हैं। पंचांग के अनुसार, अष्टमी के दिन कन्या पूजन के लिए तीन शुभ समय रहेंगे। इन तीनों मुहूर्तों में से किसी में भी कन्या पूजन करना शुभ माना गया है।

कब है अष्टमी 2026 ?

इस बार चैत्र महीने के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि की शुरुआत 25 मार्च 2026 को दोपहर 1 बजकर 50 मिनट पर हो रही है। इस तिथि का समापन 26 मार्च को सुबह 11 बजकर 48 मिनट पर माना जा रहा है उदया तिथि के अनुसार, चैत्र नवरात्रि में 26 मार्च 2026, गुरुवार को अष्टमी होगी और कन्या पूजन किया जाएगा।

अष्टमी कन्या पूजन का शुभ मुहूर्त

26 मार्च को अष्टमी के दिन सुबह 6 बजकर 18 मिनट से 7:50 तक कन्या पूजन कर सकते हैं। इसके अलावा सुबह 10:55 से दोपहर 3:31 तक का भी शुभ समय बना रहेगा।

कब है नवमी 2026 ?

पंचांग के मुताबिक, चैत्र महीने के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि 26 मार्च 2026 को सुबह 11 बजकर 48 मिनट पर शुरू हो रही है। इस तिथि का समापन 27 मार्च 2026 को सुबह 10 बजकर 06 मिनट पर होगा। अब चूंकि राम जी का जन्म अभिजीत मुहूर्त में हुआ था। रामनवमी का पर्व 26 मार्च 2026 को मनाया जाएगा। हालांकि, नवमी कन्या पूजन 27 मार्च 2026 को सुबह 10 बजकर 06 मिनट तक किया जाएगा। इस दौरान चैत्र नवरात्रि 2026 का व्रत पारण भी 27 मार्च को ही किया जाएगा।

अष्टमी पर कन्या पूजन विधि

कन्या पूजन के लिए 2 से 10 वर्ष तक की कन्याओं को आमंत्रित करना चाहिए।

- कन्याओं के घर आने पर उनके पैर धोएं और उन्हें साफ़ आसन पर बैठाएं।

- कन्याओं के माथे पर कुमकुम/रोली का तिलक लगाएं और उनके हाथ में कलावा (मौली) बांधें।

- उन्हें श्रद्धापूर्वक सात्विक भोजन (जैसे पूरी, हलवा, चना) खिलाएं। भोजन में एक बालक (लंगूर) को भी जरूर बिठाएं।

- भोजन के बाद कन्याओं को उपहार, फल या कुछ दक्षिणा दें।

- अंत में उनके पैर छूकर आशीर्वाद लें और उन्हें सम्मान के साथ विदा करें

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