सुप्रीम कोर्ट की सख्ती! दुष्कर्म मामलों में पीड़िता की पहचान उजागर ना करें.. हाईकोर्ट को दिए निर्देश
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने दुष्कर्म मामलों में पीड़िता की पहचान उजागर करने को लेकर गहरी नाराजगी जताते हुए सभी हाई कोर्ट को कड़ी फटकार लगाई है। कोर्ट ने रजिस्ट्रार जनरल को कड़े निर्देश जारी देते हुए कहा कि भविष्य के साथ-साथ सभी लंबित मामलों में भी पीड़िता की गोपनीयता का सख्ती से पालन किया जाए।
अदालती आदेशों में नाम पर रोक
जस्टिस संजय करोल और जस्टिस एन. कोटिस्वर सिंह की पीठ ने आदेश दिया है कि हाई कोर्ट और निचली अदालतें अपने फैसलों, आदेशों या किसी भी कानूनी रिकॉर्ड में पीड़िता और उसके परिवार के सदस्यों के नाम का उल्लेख कदापि न करें। अदालत ने आईपीसी (IPC) की धारा 228-ए के तहत वैधानिक निषेध का हवाला देते हुए कहा कि यौन उत्पीड़न की उत्तरजीवियों की पहचान उजागर करना एक दंडनीय अपराध है।
लंबित मामलों पर लागू
यह निर्देश उन सभी मामलों पर भी लागू होगा जो 2018 के निपुण सक्सेना बनाम भारत संघ फैसले से पहले के हैं। शीर्ष अदालत ने इस बात पर दुख जताया कि अदालतों और पुलिस की "सामान्य उदासीनता" के कारण बार-बार पीड़िता की पहचान सार्वजनिक हो रही है, जिससे उन्हें सामाजिक कलंक का सामना करना पड़ता है।
सजा का प्रावधान लाया गया
पीड़िता की पहचान उजागर करने पर 2 साल तक की कैद और जुर्माने का प्रावधान है। अदालत ने साफ किया कि पीड़िता की गरिमा की रक्षा करना न्यायपालिका और कानून प्रवर्तन एजेंसियों की वैधानिक जिम्मेदारी है।