स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के शिष्यों पर बलप्रयोग के खिलाफ याचिका पर सुनवाई से सुप्रीम कोर्ट का इंकार! कहा- राज्य सरकार के कामकाज में हम हस्तक्षेप नहीं करेंगे...

बेंच ने कहा कि कानून-व्यवस्था का विषय राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र में आता है। यदि याचिकाकर्ता को कोई बात कहनी है, तो वह संबंधित अथॉरिटी को ज्ञापन दे सकता है

Update: 2026-02-16 11:31 GMT

नई दिल्ली। प्रयागराज में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के शिष्यों और समर्थकों के साथ पुलिस के बल प्रयोग करने वाले मामले की याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने सुनने से इंकार कर दिया। कोर्ट ने कहा है कि कानून-व्यवस्था राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र में आती है, इसलिए हम इसमें हस्तक्षेप नहीं करेंगे। हांलाकि याचिकाकर्ता संबंधित ऑथोरिटी के सामने अपनी बात रख सकता है।

सुप्रीम कोर्ट के जजों ने सुनवाई से किया इंकार

आज यानी सोमवार को इस मामले पर चीफ जस्टिस सूर्य कांत, जस्टिस जोयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली की बेंच में सुनवाई के लिए बैठी, लेकिन जजों ने इसे सुनने से इंकार कर दिया। बेंच ने कहा कि कानून-व्यवस्था का विषय राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र में आता है। यदि याचिकाकर्ता को कोई बात कहनी है, तो वह संबंधित अथॉरिटी को ज्ञापन दे सकता है। इस मामले में कोर्ट किसी तरह का दखल नहीं देगा।

मौनी अमावस्या के मौके पर पुलिस ने किया था बल प्रयोग

दरअसल माघ मेले के दौरान 18 जनवरी को मौनी अमावस्या के मौके पर संगम में स्नान के लिए जा रहे अविमुक्तेश्वरानंद के समर्थकों पर पुलिस ने बल प्रयोग किया था। जानकारी के मुताबिक, अविमुक्तेश्वरानंद पैदल चलने की बजाय अपनी पालकी पर ही स्नान के लिए जाना चाहते थे। इससे रोकने पर उनके शिष्य पुलिसकर्मियों से भिड़ गए और बाद में बलप्रयोग किया गया था।

मेला प्रशासन ने भेजा था नोटिस

इस घटना के बाद धरने पर बैठे अविमुक्तेश्वरानंद को माघ मेला प्रशासन ने एक नोटिस भी भेजा था। इसके तहत उनके खुद को शंकराचार्य बताने पर भी सवाल उठे थे। दरअसल सुप्रीम कोर्ट ने उनके इस पद पर अभिषेक पर रोक लगा रखा है। इस नोटिस को लेकर भी उनके समर्थकों ने नाराजगी जताई। उज्ज्वल गौड़ नाम के वकील ने मामले में याचिका दायर करते हुए धार्मिक मामलों में प्रशासन के हस्तक्षेप का विरोध किया था। उन्होंने इस तरह के आयोजनों के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) बनाने की भी मांग की थी।

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