सुप्रीम कोर्ट ने UGC के नए नियम पर लगाई रोक, जानें कब होगी अगली सुनवाई

Update: 2026-01-29 07:37 GMT

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट आज यूजीसी के नए भेदभाव विरोधी नियमों को चुनौती देने वाली जनहित याचिका पर सुनवाई कर रहा है। याचिकाकर्ता का कहना है कि ये नियम सामान्य वर्ग के छात्रों के साथ भेदभाव करते हैं और इन्हें लेकर देशभर में विरोध हो रहा है। अदालत ने तत्काल सुनवाई पर सहमति जताते हुए कहा है कि वह मामले की स्थिति से अवगत है। सुप्रीम कोर्ट ने UGC के नए नियम पर अगले आदेश तक रोक लगा दी है। हालांकि इस मामले में अगली सुनवाई 19 मार्च को होगी।     

 भेदभाव के रूप में परिभाषित किया गया

दरअसल, चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस ज्योमाल्या बागची की बेंच ने सुनवाई की। विष्णु शंकर जैन ने याचिकाकर्ता की ओर से दलीलें देनी शुरू की। जैन ने कहा कि इससे समाज में विभेद पैदा हो रहा है। उन्होंने नियम के सेक्शन 3C को चुनौती दी। विष्णु जैन ने कहा कि इस अधिसूचना की धारा 3(c) में SC, ST, OBC के खिलाफ जाति आधारित भेदभाव के रूप में परिभाषित किया गया है। इसमें जनरल कैटेगरी के सदस्यों को पूरी तरह से बाहर रखा गया है। ये 3C अनुच्छेद 14 पर असर डालती है और E में दी गई परिभाषा पूरी तरह से भेदभाव पूर्ण है।

1956 का उल्लंघन बताते हुए चुनौती दी थी

सुप्रीम कोर्ट ने 23 जनवरी को नोटिफाई किए गए यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशन्स में इक्विटी को बढ़ावा देना) रेगुलेशंस पर रोक लगा दी है। कई पिटीशनर्स ने इसे मनमाना, अलग-थलग करने वाला, भेदभाव वाला और संविधान के साथ-साथ यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन एक्ट, 1956 का उल्लंघन बताते हुए चुनौती दी थी।

समितियों का गठन अनिवार्य किया गया है

नए नियमों के तहत सभी उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता समितियों का गठन अनिवार्य किया गया है, जिनमें ओबीसी, एससी, एसटी, महिलाओं और दिव्यांगों का प्रतिनिधित्व जरूरी होगा। आलोचकों का आरोप है कि नए नियमों में स्पष्ट प्रक्रिया का अभाव है और इनके दुरुपयोग की आशंका बनी हुई है। उनका कहना है कि नया ढांचा ओबीसी समुदाय को संभावित पीड़ित मानता है, लेकिन सामान्य वर्ग के छात्रों को बाहर रखता है, जिससे उन्हें भेदभाव का स्थायी दोषी बताया जा रहा है। इन नियमों के खिलाफ कई राज्यों में छात्र प्रदर्शन कर रहे हैं जबकि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने भरोसा दिलाया है कि नियमों का गलत इस्तेमाल नहीं होने दिया जाएगा और किसी के साथ भेदभाव नहीं होगा।

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