पीएम सदन में आने से डर रहे थे, सदस्यों की वजह से नहीं, बल्कि...राहुल गांधी ने सरकार पर तीखा वार कर किए ये सवाल
नई दिल्ली। लोकसभा में LoP और कांग्रेस MP राहुल गांधी ने सदन में पीएम पर कथित हमला को लेकर कहा कि कहानी कुछ दिन पहले शुरू हुई जब नरवणे की किताब का मुद्दा आया और सरकार नहीं चाहती थी कि मैं उस पर बिल्कुल भी चर्चा करूं। इसलिए उन्होंने सदन को रोक दिया। उन्होंने मुझे बोलने नहीं दिया। ऐसा तीन-चार बार हुआ। पहले, उन्होंने कहा कि मैं कोई किताब कोट नहीं कर सकता। फिर मैंने कहा कि मैं कोई किताब कोट नहीं कर रहा, मैं एक मैगजीन कोट कर रहा हूं।
बहुत घटिया बातें कहीं और कुछ नहीं कहा गया
उन्होंने कहा कि फिर उन्होंने कहा कि आप कोई मैगजीन कोट नहीं कर सकते। फिर मैंने कहा कि मैं इसके बारे में बोलूंगा। फिर वे नहीं चाहते थे कि मैं इसके बारे में बोलूं। रक्षा मंत्री ने झूठ बोला कि किताब पब्लिश नहीं हुई है। असल में, किताब पब्लिश हो चुकी है और हमारे पास उसकी एक कॉपी भी है। तो यह एक बड़ा मुद्दा है। LoP और पूरे विपक्ष को राष्ट्रपति के भाषण में बोलने नहीं देना। दूसरा मुद्दा यह है कि उनके एक सदस्य ने किताबें कोट करते हुए, कई किताबें कोट कीं, बहुत घटिया बातें कहीं और कुछ नहीं कहा गया। हमें यह पसंद नहीं है कि वे जब चाहें, जो चाहें कह सकते हैं और विपक्ष नहीं कह सकता।"
तीसरा मुद्दा हमारे सदस्यों का सस्पेंशन है
राहुल गांधी ने इस दौरान कहा कि तीसरा मुद्दा हमारे सदस्यों का सस्पेंशन है और आखिरी मुद्दा, जिससे हम बहुत परेशान हैं, वह यह आइडिया है जो फैलाया गया है कि सदस्य प्रधानमंत्री को धमकी देने वाले थे। इसका कोई सवाल ही नहीं है। सच तो यह है कि प्रधानमंत्री सदन में आने से डर रहे थे, सदस्यों की वजह से नहीं, बल्कि इसलिए कि मैं क्या कह रहा था। वह अभी भी डरे हुए हैं क्योंकि वह सच का सामना नहीं कर सकते। हमारे सदस्यों के प्रधानमंत्री पर हमला करने का कोई सवाल ही नहीं है। उनमें आने की हिम्मत होनी चाहिए। मैंने यह भी कहा कि अगर किसी ने कहा कि वह प्रधानमंत्री पर हमला करने वाला है, तो प्लीज तुरंत FIR करें। उस व्यक्ति को अरेस्ट करें। आप ऐसा क्यों नहीं कर रहे हैं? तो असल में यही हुआ है।
सरकार बजट पर डिबेट करने को लेकर परेशान है
उन्होंने आगे कहा कि एग्रीमेंट यह है कि हमें ये बातें कहने की इजाजत होगी और फिर डिस्कशन होना चाहिए। इसलिए हम चाहते हैं कि डिस्कशन हो। हम चाहते हैं कि डिस्कशन हो, लेकिन अब देखते हैं कि सरकार क्या कहती है। मेरा पर्सनल व्यू है कि सरकार डिबेट करने से डर रही है। प्राइम मिनिस्टर हाउस में इसलिए नहीं आए क्योंकि उन्हें डर था कि हम क्या कहने वाले हैं। उन्हें डर था कि पहले स्टेप के तौर पर उन्हें जनरल नरवणे की किताब थमा दी जाएगी। मेरा अंदाजा है कि सरकार बजट पर डिबेट करने को लेकर परेशान है क्योंकि US डील का मुद्दा, जिस तरह से यह किया गया, जो हुआ है, हमारे किसानों पर इसका असर, इन सब पर डिस्कस किया जाएगा, और सरकार ऐसा नहीं करना चाहती।