रामलला के चरणों में थे इतने दिव्य चिन्ह, जानें क्या हैं उनके महत्व..

ऐसी भी एक मान्यता है कि भगवान के दाहिने पैर के चिह्न माता सीता के बाएं चरण में और बाएं पैर के चिह्न उनके दाहिने चरण में विराजमान हैं

By :  Aryan
Update: 2026-03-27 13:30 GMT

नई दिल्ली। आज यानी शुक्रवार को उदया तिथि में रामनवमी मनाया रहा है। राम नवमी के पावन पर्व पर रामलला के जन्मोत्सव की छटा हर जगह देखने को मिल रही है। आज का खास दिन मर्यादा, धर्म और आदर्श जीवन की याद दिलाने वाला है। इस खास अवसर पर भक्तजन भगवान राम की कथाओं के साथ उनसे जुड़ी मान्यताओं को भी पढ़ते हैं। पौराणिक कथाओं की मान्यता के मुताबिक ऐसी ही एक वर्णन श्रीराम के चरणों की महिमा का है। बहुत कम लोगों को पता होगा कि राम जी के चरणों में अनेक शुभ और आध्यात्मिक चिह्न हैं, जो कि बेहद खास होते हैं।

इन शुभ चिन्हों को किया गया वर्णन

दरअसल रामचरितमानस में गोस्वामी तुलसीदास ने उनके चरणों के कुछ प्रमुख चिह्नों जैसे ध्वज, वज्र, अंकुश, कमल और ऊर्ध्व रेखा का वर्णन किया है। वहीं अन्य धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, श्रीराम के चरणों में कुल 48 दिव्य चिन्ह मौजूद हैं, जो अलग-अलग आध्यात्मिक शक्तियों का प्रतीक माने जाते हैं। ऐसी भी एक मान्यता है कि भगवान के दाहिने पैर के चिह्न माता सीता के बाएं चरण में और बाएं पैर के चिह्न उनके दाहिने चरण में विराजमान हैं।

दाहिने चरण में अंकित चिह्न

श्रीराम के दाहिने पैर में मौजूद चिह्न जीवन में सफलता, शक्ति और सुरक्षा का प्रतीक माने जाते हैं। इनमें ऊर्ध्व रेखा मोक्ष की ओर जाने वाली मानी जाती है, जबकि स्वास्तिक शुभता और कल्याण का संकेत है। वहीं, कमल का चिन्ह खुशी और यश बढ़ाने वाला माना जाता है, जबकि वज्र शक्ति और पापों के नाश का प्रतीक है।

मन को नियंत्रण में रखने वाला अंकुश

इसके साथ ही ध्वजा विजय और सम्मान दिलाने वाली मानी जाती है, जबकि अंकुश मन को नियंत्रण में रखने का संदेश देता है। कल्पवृक्ष सभी इच्छाओं की पूर्ति से जुड़ा रथ, चक्र और सिंहासन जैसे चिह्न पराक्रम, प्रभुत्व और शत्रुओं पर विजय का संकेत देते हैं। वहीं, यमदंड, छत्र और चामर जैसे चिन्ह भय से मुक्ति और ऐश्वर्य प्रदान करने वाले माने जाते हैं।

बाएं चरण के पवित्र चिह्न

श्रीराम के बाएं पैर के चिह्न शांति, भक्ति और ज्ञान से जुड़े होते हैं। सरयू का चिन्ह पापों को दूर करने वाला माना जाता है, जबकि शंख बुद्धि और पवित्रता का प्रतीक है। अर्धचंद्र मन को शांति देता है और प्रेम बढ़ाता है। कलश और बिंदु जैसे चिह्न जीवन में पूर्णता और सफलता का संकेत देते हैं। मछली का चिन्ह भगवान के प्रति गहरे प्रेम को दर्शाता है।

हंस विवेक का प्रतीक

वहीं, हंस विवेक और ज्ञान का प्रतीक है। वीणा और वंशी कला, संगीत और भक्ति भाव को बढ़ाने वाली मानी जाती हैं। गदा, धनुष और तूणीर जैसे चिन्ह शक्ति और सुरक्षा का संकेत देते हैं, जबकि चन्द्रिका और पूर्ण चन्द्र उज्ज्वल भविष्य और मानसिक शांति का प्रतीक माने जाते हैं।

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