1 अप्रैल से क्रेडिट कार्ड के नियमों में 5 बड़े बदलाव प्रस्तावित हैं, जो मुख्य रूप से इनकम टैक्स (Income Tax) की रिपोर्टिंग और पारदर्शिता से जुड़े हैं। ये नए ड्राफ्ट नियम आपके खर्च करने और बिल भुगतान के तरीके को प्रभावित करेंगे।
बड़े भुगतान की रिपोर्टिंग
यदि आप साल भर में ₹10 लाख या उससे अधिक के क्रेडिट कार्ड बिल का भुगतान (गैर-नकद माध्यम से) करते हैं, तो बैंक इसकी रिपोर्ट आयकर विभाग को देगा।
कैश पेमेंट पर निगरानी
क्रेडिट कार्ड बिल के रूप में ₹1 लाख या उससे अधिक का नकद (Cash) भुगतान करने पर भी आयकर विभाग को जानकारी दी जाएगी।
PAN अनिवार्य
नया क्रेडिट कार्ड बनवाने के लिए अब पैन (PAN) कार्ड देना अनिवार्य होगा, जिससे आपके लेनदेन को टैक्स सिस्टम से जोड़ना आसान हो सके।
टैक्स भुगतान की सुविधा
क्रेडिट कार्ड को अब इनकम टैक्स और GST जैसे प्रत्यक्ष करों के भुगतान के लिए एक आधिकारिक इलेक्ट्रॉनिक मोड के रूप में मान्यता दी जाएगी।
कंपनी कार्ड पर टैक्स (Perquisite)
यदि आपकी कंपनी आपको क्रेडिट कार्ड देती है और उसके व्यक्तिगत खर्चों या वार्षिक फीस का भुगतान करती है, तो इसे आपकी आय (Perquisite) माना जाएगा और उस पर टैक्स लगेगा, बशर्ते खर्च केवल आधिकारिक काम के लिए न हो।
बैंकों द्वारा किए गए अन्य महत्वपूर्ण बदलाव (1 अप्रैल 2025 से प्रभावी)
पिछले वर्ष (2025) भी कई बैंकों ने अपने रिवॉर्ड स्ट्रक्चर में बदलाव किए थे, जिन्हें ध्यान में रखना जरूरी है।
SBI Card
क्लब विस्तारा (Club Vistara) और एयर इंडिया (Air India) कार्ड्स पर मिलने वाले रिवॉर्ड पॉइंट्स और मील का पत्थर (Milestone) बेनिफिट्स कम कर दिए गए थे।
IDFC FIRST Bank
विस्तारा कार्ड पर मिलने वाले कॉम्प्लिमेंट्री टिकट वाउचर और अन्य सुविधाएं बंद कर दी गई थीं।
Axis Bank
विस्तारा क्रेडिट कार्ड के फायदों में कटौती की गई थी, हालांकि नवीनीकरण शुल्क (Renewal Fee) माफ करने जैसे बदलाव भी हुए थे।
लाउंज एक्सेस (Lounge Access)
ICICI और HDFC जैसे बैंकों ने लाउंज एक्सेस के लिए तिमाही खर्च की सीमा (जैसे ₹75,000 प्रति तिमाही) को और सख्त कर दिया था।