इन 5 लोगों को नहीं देखना चाहिए होलिका दहन! जानें क्यों होली से पहले ससुराल चली जाती है नई दुल्हन

Update: 2026-02-26 02:30 GMT

नई दिल्ली। धार्मिक मान्यताओं और लोक परंपराओं के अनुसार, होलिका दहन की अग्नि को देखना कुछ लोगों के लिए अशुभ माना जाता है। विशेष रूप से नई दुल्हनों के लिए शादी के बाद की पहली होली मायके में मनाने का रिवाज है।

ये 5 लोग नहीं देखते होलिका दहन

नवविवाहित महिलाएं: शादी के बाद पहली होली पर ससुराल में होलिका दहन देखना वर्जित है। माना जाता है कि जलती हुई होलिका (जो एक स्त्री का प्रतीक थी) को देखने से वैवाहिक जीवन में कलह या दुर्भाग्य आ सकता है。

गर्भवती महिलाएं: शास्त्रों के अनुसार, इस समय नकारात्मक ऊर्जा सक्रिय होती है, जो गर्भस्थ शिशु पर बुरा प्रभाव डाल सकती है। वैज्ञानिक रूप से भी धुएँ और गर्मी से बचने की सलाह दी जाती है।

नवजात शिशु: छोटे बच्चों को नकारात्मक शक्तियों के प्रभाव और स्वास्थ्य जोखिमों से बचाने के लिए दहन स्थल से दूर रखा जाता है।

सास और बहू: कई क्षेत्रों में सास-बहू का एक साथ होलिका दहन देखना वर्जित है। मान्यता है कि इससे उनके रिश्तों में खटास आ सकती है।

इकलौती संतान के माता-पिता: कुछ परंपराओं में जिस व्यक्ति की केवल एक ही संतान हो, उसे होलिका की अग्नि प्रज्वलित करने या उसे देखने से मना किया जाता है।

नई दुल्हन क्यों चली जाती है मायके?

नई दुल्हन का पहली होली पर मायके जाने के पीछे मुख्य रूप से दो कारण बताए जाते हैं।

इलोजी और होलिका की कथा: पौराणिक कथा के अनुसार, जिस दिन होलिका जली, अगले दिन उसका विवाह इलोजी से होना था। इलोजी की माँ ने जब होलिका को जलते देखा, तो वे बेसुध हो गईं। इस दुखद घटना के कारण नई बहू का ससुराल में जलती होली देखना अशुभ माना जाने लगा।

दहन का प्रतीक: होलिका दहन "विनाश" या "दहन" का प्रतीक है। वैवाहिक जीवन की शुरुआत में किसी भी प्रकार की नकारात्मक ऊर्जा या "दहन" से बचने के लिए दुल्हन को मायके भेज दिया जाता है।

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