आज अनंग त्रयोदशी के संयोग में रखा जाएगा चैत्र मास का अंतिम प्रदोष व्रत, जानें पूजा विधि और कथा...
चैत्र मास का अंतिम प्रदोष व्रत आज यानी सोमवार को पड़ रहा है। ऐसे में इसे सोम प्रदोष व्रत कहा जाएगा। वहीं, इस दिन अनंग त्रयोदशी का भी संयोग बन रहा है। चैत्र मास की शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर अनंग त्रयोदशी का व्रत किया जाता है। इस संयोग में व्रत करने से भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है, इसके साथ ही दांपत्य जीवन सुखद बना रहता है। हर महीने में शुक्ल और कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर प्रदोष व्रत किया जाता है।
सोम प्रदोष व्रत के लाभ एवं नियम
महत्व: यह व्रत भगवान शिव को समर्पित है और विशेष रूप से सोमवार को पड़ने पर इसे 'सोम प्रदोष' कहा जाता है।
फल: माना जाता है कि इस व्रत को करने से कुंडली में चंद्रमा का दोष दूर होता है और सुख-समृद्धि आती है।
पूजा विधि: पूजा शाम के समय यानी प्रदोष काल (सूर्यास्त के समय) में की जाती है।
आहार: व्रत के दौरान निराहार रहने का विधान है, लेकिन शाम की पूजा के बाद फलाहार (साबूदाना, फल, दूध) लिया जा सकता है।
सोम प्रदोष व्रत कथा
प्राचीन काल में एक विधवा ब्राह्मणी अपने पुत्र के साथ रहती थी। वह अत्यंत निर्धन थी और भिक्षा मांगकर अपना जीवन निर्वाह करती थी। एक दिन जब वह भिक्षा लेकर लौट रही थी, तो उसे नदी के किनारे एक सुंदर बालक मिला। वह बालक विदर्भ देश का राजकुमार था, जिसके पिता को शत्रुओं ने मारकर उसका राज्य छीन लिया था। दयावश ब्राह्मणी उस बालक को अपने साथ घर ले आई और अपने पुत्र की तरह पालने लगी। एक बार ऋषि शांडिल्य ने उस ब्राह्मणी को प्रदोष व्रत करने की सलाह दी। ब्राह्मणी ने विधि-विधान से सोम प्रदोष का व्रत शुरू किया।
अनंग त्रयोदशी
कामदेव (अनंग देव) और रति को समर्पित एक पवित्र व्रत है, जिसमें भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा की जाती है। यह वैवाहिक सुख, प्रेम संबंध मजबूत करने और संतान प्राप्ति के लिए किया जाता है, क्योंकि इस दिन भगवान शिव ने कामदेव को पुनर्जीवित किया था।